मनोरंजन
श्रीरामलीला मंचन के अष्टम दिवस मुख्य अतिथि कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर के अपर पुलिस आयुक्त श्री राजीव नारायण मिश्रा,अपर पुलिस उपायुक्त अभय कुमार मिश्रा, एवं श्रीदुधेश्वरनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर श्री महंत नारायण गिरी जी महाराज, मौजूद रहे।
Rajesh mandal
श्रीराम मित्र मंडल नोएडा रामलीला समिति के चेयरमैन उमाशंकर गर्ग,अध्यक्ष धर्मपाल गोयल एवं महासचिव डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा द्वारा मुख्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर और अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत किया गया।
सर्वप्रथम श्रीराम जी की सुग्रीव से भेंट होती है और यह भेंट मित्रता में बदल जाता है।फिर श्रीराम द्वारा बाली का वध किया जाता है।बाली वध के उपरांत सुग्रीव का राजतिलक होता है।कुछ समय व्यतीत होने के बाद सीता की खोज के लिए सुग्रीव कोई प्रयास नहीं करते हैं।इससे श्रीराम व लक्ष्मण सुग्रीव पर क्रोधित होते हैं ।सीता की खोज के लिए अंगद,नील,जाम्वन्त,हनुमान को दक्षिण दिशा में भेजा जाता है।खोजते-खोजते उनकी भेंट सम्पाती से होती है जो कि जटायु का भाई है।उसने बताया कि सीता लंका में है और जो सौ योजन समुंद्र को लांघ सकता हो वही वहां जा सकता है।समुंद्र तट पर जाम्वन्त ने हनुमान जी को उनका बल याद दिलाया।इसके बाद हनुमान जी भगवान श्रीराम का नाम सुमिर कर लंका की ओर प्रस्थान करते हैं।रास्ते में उन्हें सुरसा मिलती है।सुरसा अपना बदन सोलह योजन तक फैलाती है।हनुमान जी 32 योजन तक अपना बदन फैलाते हैं।जब सुरसा समझ जाती है तो हनुमान जी सर नवाकर आगे चलते हैं। हनुमान जी अशोक वाटिका पहुंचकर जहां सीता बैठी हुई हैं उस पेड़ पर छुप जाते हैं और रामनाम की अंगूठी ऊपर से डालते हैं जिसे देखकर सीता के मन में विषमय होता है। इसके बाद सीताजी से आज्ञा पाकर हनुमान वाटिका से फल खाने लगते हैं और पेड़ तोडने लगते हैं।जब बाग के रखवालों ने रावण को बताया तो उसने अक्षय कुमार को भेजा जिसका हनुमान जी वध कर देते हैं।मेघनाद द्वारा हनुमान जी को पकड़कर रावण के दरबार में लाया जाता है,जहाँ हनुमान रावण से कहते हैं कि अब भी समय है अपने कुकर्मों के लिए श्रीराम से क्षमा मांग लो।वह दया की मूर्ति हैं ।निसंदेह तुमको क्षमा कर देंगे।परन्तु रावण अपने अहंकार में क्षमा मांगने से मना कर देता है।वहीं रावण दरबार में सभी कहते हैं कि हनुमान को मार दिया जाये।लेकिन विभीषण के समझाने पर रावण ने कहा कि इसकी पूंछ पर आग लगा दो।आग लगाने के बाद हनुमान जी एक महल से दूसरे महल पर जाते हैं और इस तरह पूरी लंका को जला देते हैं।लंका दहन के पश्चात रावण दरबार में श्रीराम से युद्ध की नीतियों पर सभी दरबारी अपनी राय प्रस्तुत कर रहे थे।रावण द्वारा विभीषण से उनकी राय पूछी जाती है।विभीषण,रावण से कहते हैं कि अब भी समय है तुम राम की शरण में चले जाओ।रावण इस बात पर अत्यधिक क्रोधित हो जाता है और विभीषण को लात मारकर लंका से बाहर जाने का आदेश देता है।रावण के त्याग के पश्चात विभीषण श्रीराम की शरण में चले जाते हैं।अगले दृश्य में श्रीराम रामेश्वरम की स्थापना हेतु भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं और तत्पश्चाल नल और नील द्वारा सेतु बंधन का कार्य प्रारंभ किया जाता है।नल और नील द्वारा श्रीराम का नाम लिखकर फेंके गए पत्थर समुद्र में डूबते नहीं हैं।
श्रीराम मित्र मंडल रामलीला समिति के महासचिव डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा ने बताया कि 19 अक्टूबर को अंगद-रावण संवाद,मेघनाद-लक्ष्मण युद्ध,लक्ष्मण मूर्छा, संजीवनी बूटी,कुंभकरण वध,मेघनाद वध आदि प्रसंगों का मंचन किया जायेगा।इस अवसर पर समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार गर्ग,कोषाध्यक्ष राजेन्द्र गर्ग,सलाहकार मनोज शर्मा,सह-कोषाध्यक्ष अनिल गोयल,मीडिया प्रभारी मुकेश गुप्ता,गिरिराज बहेड़िया,चक्रपाणि गोयल,वरिष्ठ उपाध्यक्ष सतनारायण गोयल,चौधरी रविन्द्र सिंह,दयाशंकर तिवारी,तरुणराज,पवन गोयल,मुकेश गोयल,बजरंग लाल गुप्ता,एस एम गुप्ता,गौरव मेहरोत्रा,मुकेश अग्रवाल,भानुप्रताप सिंह,अनंत वर्मा,राजेश माथुर,साहिल चौधरी,नवीन पोरवाल,बीके राय,रामकुमार शर्मा,दिनेश मित्तल,अर्जुन अरोड़ा, आर के उप्रेती,बाबूराम शर्मा,संतोष त्रिपाठी,अर्जुन प्रजापति,नरेंद्र आर्य,मनीष सिंह चौहान,उमेश यादव सहित श्रीराम मित्र मंडल नोएडा रामलीला समिति के सदस्यगण व शहर के हजारों गणमान्य व्यक्ति उपस्तिथ रहे।
सर्वप्रथम श्रीराम जी की सुग्रीव से भेंट होती है और यह भेंट मित्रता में बदल जाता है।फिर श्रीराम द्वारा बाली का वध किया जाता है।बाली वध के उपरांत सुग्रीव का राजतिलक होता है।कुछ समय व्यतीत होने के बाद सीता की खोज के लिए सुग्रीव कोई प्रयास नहीं करते हैं।इससे श्रीराम व लक्ष्मण सुग्रीव पर क्रोधित होते हैं ।सीता की खोज के लिए अंगद,नील,जाम्वन्त,हनुमान को दक्षिण दिशा में भेजा जाता है।खोजते-खोजते उनकी भेंट सम्पाती से होती है जो कि जटायु का भाई है।उसने बताया कि सीता लंका में है और जो सौ योजन समुंद्र को लांघ सकता हो वही वहां जा सकता है।समुंद्र तट पर जाम्वन्त ने हनुमान जी को उनका बल याद दिलाया।इसके बाद हनुमान जी भगवान श्रीराम का नाम सुमिर कर लंका की ओर प्रस्थान करते हैं।रास्ते में उन्हें सुरसा मिलती है।सुरसा अपना बदन सोलह योजन तक फैलाती है।हनुमान जी 32 योजन तक अपना बदन फैलाते हैं।जब सुरसा समझ जाती है तो हनुमान जी सर नवाकर आगे चलते हैं। हनुमान जी अशोक वाटिका पहुंचकर जहां सीता बैठी हुई हैं उस पेड़ पर छुप जाते हैं और रामनाम की अंगूठी ऊपर से डालते हैं जिसे देखकर सीता के मन में विषमय होता है। इसके बाद सीताजी से आज्ञा पाकर हनुमान वाटिका से फल खाने लगते हैं और पेड़ तोडने लगते हैं।जब बाग के रखवालों ने रावण को बताया तो उसने अक्षय कुमार को भेजा जिसका हनुमान जी वध कर देते हैं।मेघनाद द्वारा हनुमान जी को पकड़कर रावण के दरबार में लाया जाता है,जहाँ हनुमान रावण से कहते हैं कि अब भी समय है अपने कुकर्मों के लिए श्रीराम से क्षमा मांग लो।वह दया की मूर्ति हैं ।निसंदेह तुमको क्षमा कर देंगे।परन्तु रावण अपने अहंकार में क्षमा मांगने से मना कर देता है।वहीं रावण दरबार में सभी कहते हैं कि हनुमान को मार दिया जाये।लेकिन विभीषण के समझाने पर रावण ने कहा कि इसकी पूंछ पर आग लगा दो।आग लगाने के बाद हनुमान जी एक महल से दूसरे महल पर जाते हैं और इस तरह पूरी लंका को जला देते हैं।लंका दहन के पश्चात रावण दरबार में श्रीराम से युद्ध की नीतियों पर सभी दरबारी अपनी राय प्रस्तुत कर रहे थे।रावण द्वारा विभीषण से उनकी राय पूछी जाती है।विभीषण,रावण से कहते हैं कि अब भी समय है तुम राम की शरण में चले जाओ।रावण इस बात पर अत्यधिक क्रोधित हो जाता है और विभीषण को लात मारकर लंका से बाहर जाने का आदेश देता है।रावण के त्याग के पश्चात विभीषण श्रीराम की शरण में चले जाते हैं।अगले दृश्य में श्रीराम रामेश्वरम की स्थापना हेतु भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं और तत्पश्चाल नल और नील द्वारा सेतु बंधन का कार्य प्रारंभ किया जाता है।नल और नील द्वारा श्रीराम का नाम लिखकर फेंके गए पत्थर समुद्र में डूबते नहीं हैं।
श्रीराम मित्र मंडल रामलीला समिति के महासचिव डॉ॰मुन्ना कुमार शर्मा ने बताया कि 19 अक्टूबर को अंगद-रावण संवाद,मेघनाद-लक्ष्मण युद्ध,लक्ष्मण मूर्छा, संजीवनी बूटी,कुंभकरण वध,मेघनाद वध आदि प्रसंगों का मंचन किया जायेगा।इस अवसर पर समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार गर्ग,कोषाध्यक्ष राजेन्द्र गर्ग,सलाहकार मनोज शर्मा,सह-कोषाध्यक्ष अनिल गोयल,मीडिया प्रभारी मुकेश गुप्ता,गिरिराज बहेड़िया,चक्रपाणि गोयल,वरिष्ठ उपाध्यक्ष सतनारायण गोयल,चौधरी रविन्द्र सिंह,दयाशंकर तिवारी,तरुणराज,पवन गोयल,मुकेश गोयल,बजरंग लाल गुप्ता,एस एम गुप्ता,गौरव मेहरोत्रा,मुकेश अग्रवाल,भानुप्रताप सिंह,अनंत वर्मा,राजेश माथुर,साहिल चौधरी,नवीन पोरवाल,बीके राय,रामकुमार शर्मा,दिनेश मित्तल,अर्जुन अरोड़ा, आर के उप्रेती,बाबूराम शर्मा,संतोष त्रिपाठी,अर्जुन प्रजापति,नरेंद्र आर्य,मनीष सिंह चौहान,उमेश यादव सहित श्रीराम मित्र मंडल नोएडा रामलीला समिति के सदस्यगण व शहर के हजारों गणमान्य व्यक्ति उपस्तिथ रहे।