📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / ShotgunMavericks
धर्म
दरजीलीन पहाड़ियों, टेराई और दोआर्स में शरद पावन और लक्ष्मी पूजा का उत्सव
✍️ News On AIR
🗓 26 अक्टू. 2026, 12:36 PM
👁 15
दरजीलीन पहाड़ियों, टेराई और दोआर्स में शरद पावन और लक्ष्मी पूजा पारंपरिक रीति‑रिवाजों व दीयों से मनाई गई।
शरद पूर्णिमा, जो शरद ऋतु की पूर्णिमा को दर्शाता है, 31 अक्टूबर को दरजीलीन पहाड़ियों, टेराई और दोआर्स क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया गया। लोग छतों और खुले मैदानों पर दीये जलाकर, आकाश में लालटेन छोड़कर और देवी लक्ष्मी को कheer दान जैसे पारंपरिक अनुष्ठान करके उत्सव को साकार किया।\n\nदरजीलीन शहर के मंदिरों में विशेष पूजा आयोजित की गई, जहाँ पुजारी मंत्रोच्चार करते और भक्त फूल व मिठाई अर्पित करते। दोआर्स के चाय बागानों में भी अस्थायी वेदी स्थापित कर सामुदायिक भोजन का आयोजन किया गया।\n\nउत्सव के दौरान क्षेत्रीय लोकगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए, जो इस क्षेत्र की विविध जातीय विरासत को दर्शाते हैं। स्थानीय पुलिस ने भी भीड़ नियंत्रण के लिए सतर्कता बरती, जिससे कोई सुरक्षा समस्या नहीं हुई।\n\nशरद पूर्णिमा को बरसात के अंत और फसल के मौसम की शुरुआत के रूप में माना जाता है, और इसे अक्सर धन की देवी लक्ष्मी की पूजा से जोड़ा जाता है। इस प्रकार शरद पूर्णिमा और लक्ष्मी पूजा का संयुक्त आयोजन पश्चिम बंगाल के पहाड़ी और मैदानी समुदायों में सांस्कृतिक निरंतरता को उजागर करता है।