🔥 TRENDING जैथरा:-में शारदीय नवरात्र का भव्य शुभा... केरेडारी में शारदीय नवरात्र का भव्य शु... JD Women’s College faculty protest Mat... CJP founder Abhijeet Dipke’s 85‑year‑o... Man pushes ex‑girlfriend into Maharash... Man named Dipke departs Delhi for gran...
11 Oct 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
Religion

श्री बद्रीनाथ धाम: भगवान विष्णु का दिव्य निवास और सनातन धर्म का पावन तीर्थ

✍️ Reporter: Pranav Gaur 🗓 11 Oct 2026, 03:13 PM 👁 11
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

उत्तराखंड के चमोली जनपद में स्थित श्री बद्रीनाथ धाम, अलकनंदा नदी के तट पर भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है, जो अपनी पौराणिक मान्यताओं और अनूठी धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है।

देवभूमि उत्तराखंड के चमोली जनपद में अलकनंदा नदी के पावन तट पर स्थित श्री बद्रीनाथ धाम, सनातन धर्म के चार प्रमुख धामों में से एक है। यह पवित्र स्थल भगवान विष्णु के 'बद्रीनारायण' रूप को समर्पित है और इसे सतयुग का प्रधान तीर्थ माना जाता है। नर और नारायण नामक दो पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य सुशोभित यह मंदिर, भगवान विष्णु द्वारा मानव जाति के कल्याण हेतु की गई घोर तपस्या का साक्षी है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु यहाँ कठोर ठंड में ध्यानमग्न थे, तब उनकी अर्धांगिनी माता लक्ष्मी ने उन्हें हिमपात और धूप से बचाने के लिए एक विशाल बद्री वृक्ष का रूप धारण कर लिया। भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर इस स्थान का नाम 'बद्रिकाश्रम' रखा और कहा कि वे 'बद्री के नाथ' यानी बद्रीनाथ के नाम से पूजे जाएंगे। मंदिर के गर्भगृह में शालिग्राम पत्थर से बनी 1 मीटर ऊंची स्वयंभू मूर्ति पद्मासन की ध्यानमुद्रा में विराजमान है, जो परम ज्ञान और आंतरिक शांति का प्रतीक है।

बौद्ध काल के दौरान मूल मूर्ति को नारद कुंड में विसर्जित कर दिया गया था, जिसे 8वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने पुनः प्राप्त कर मंदिर में स्थापित किया। आज भी यहाँ दक्षिण भारत के नम्बूदरी ब्राह्मण (रावल) मुख्य पुजारी के रूप में सेवा करते हैं। मंदिर के निकट स्थित तप्त कुंड नामक प्राकृतिक गर्म पानी का झरना अपने औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें स्नान करने से शारीरिक कष्ट और मानसिक पापों से मुक्ति मिलती है, ऐसा शास्त्रों में वर्णित है।

शीतकाल में भारी बर्फबारी के कारण जब मंदिर के कपाट छह महीने के लिए बंद कर दिए जाते हैं, तब मंदिर के भीतर एक अक्षय घृत दीपक जलाया जाता है। लोक मान्यता है कि इस दौरान देवगण भगवान की पूजा करते हैं और कपाट खुलने पर भी यह अखंड ज्योति प्रज्वलित ही मिलती है। यह अलौकिक परंपरा श्री बद्रीनाथ धाम की दिव्यता और महत्ता को और अधिक बढ़ाती है।
📲Get App