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धर्म
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी 15 साल से नहीं हुई चुनाव, कानूनी विवाद में बनी मिनी संसद
✍️ Amar Ujala · Amritsar
🗓 09 सित. 2026, 07:39 AM
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सिखों की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने 15 साल से चुनाव नहीं करवाए, फिर भी कार्यरत है, जिससे कानूनी विवाद उत्पन्न हुआ।
सिखों की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी), जो भारत के गुरुद्वारों की देखरेख करती है, पिछले पंद्रह साल से चुनाव नहीं करवाए है। विधायी प्रावधान के बावजूद यह कमेटी एक "मिनी संसद" के रूप में कार्य करती आ रही है और धार्मिक‑प्रशासनिक निर्णय लेती है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावों की इस लम्बी अनुपस्थिति से सिख गुरुद्वारा अधिनियम के तहत निर्धारित नियमित चुनावों का उल्लंघन हो रहा है। इस मुद्दे को लेकर अदालत में याचिका दायर की गई है, जिसमें वर्तमान व्यवस्था को लोकतांत्रिक शासन के लिए हानिकारक बताया गया है।
एसजीपीसी के प्रतिनिधि तर्क देते हैं कि कमेटी की निरंतरता ग़ुरुद्वारों और संबद्ध संस्थाओं के सुचारु प्रबंधन के लिये आवश्यक है। मामला अभी न्यायालय के समक्ष है और दोनों पक्ष अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
यह विवाद सिख नेताओं और आम जनता का ध्यान आकर्षित कर रहा है, जो यह देख रहे हैं कि अदालत नई चुनाव प्रक्रिया का आदेश देगी या मौजूदा ढाँचे को बरकरार रखेगी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावों की इस लम्बी अनुपस्थिति से सिख गुरुद्वारा अधिनियम के तहत निर्धारित नियमित चुनावों का उल्लंघन हो रहा है। इस मुद्दे को लेकर अदालत में याचिका दायर की गई है, जिसमें वर्तमान व्यवस्था को लोकतांत्रिक शासन के लिए हानिकारक बताया गया है।
एसजीपीसी के प्रतिनिधि तर्क देते हैं कि कमेटी की निरंतरता ग़ुरुद्वारों और संबद्ध संस्थाओं के सुचारु प्रबंधन के लिये आवश्यक है। मामला अभी न्यायालय के समक्ष है और दोनों पक्ष अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
यह विवाद सिख नेताओं और आम जनता का ध्यान आकर्षित कर रहा है, जो यह देख रहे हैं कि अदालत नई चुनाव प्रक्रिया का आदेश देगी या मौजूदा ढाँचे को बरकरार रखेगी।