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28 सित. 2026•
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नालंदा विश्वविद्यालय में दो‑दिन का राष्ट्रीय परिसंवाद: विकसित भारत में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Sumitsurai
शिक्षा

नालंदा विश्वविद्यालय में दो‑दिन का राष्ट्रीय परिसंवाद: विकसित भारत में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका

✍️ Amar Ujala · Patna 🗓 20 सित. 2026, 07:31 AM 👁 49
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21‑22 सितंबर को राजगीर के नालंदा विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा के विकसित भारत में योगदान पर राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित होगा, जिसका उद्घाटन राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन करेंगे।

राजगीर, बिहार स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में 21 और 22 सितंबर को “विकसित भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका” शीर्षक से दो‑दिन का राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित किया जाएगा। इस मंच पर देश भर के विद्वान, शिक्षाविद् और विचारक एकत्रित होकर यह चर्चा करेंगे कि भारत की प्राचीन बौद्धिक विरासत आधुनिक विकास नीतियों को कैसे सुदृढ़ कर सकती है।

उद्घाटन सत्र का संचालन राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन करेंगे, जो उपस्थित लोगों को संबोधित कर पारम्परिक ज्ञान प्रणालियों को समकालीन विकास रणनीतियों में समाहित करने के महत्व पर प्रकाश डालेंगे। प्रतिभागी गणित, खगोलशास्त्र, आयुर्वेद, दर्शन आदि क्षेत्रों में भारतीय योगदान पर शोध‑पत्र, पैनल चर्चा और केस‑स्टडी प्रस्तुत करेंगे।

विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र ने बताया कि यह परिसंवाद नीति‑निर्माताओं और शैक्षणिक संस्थानों के बीच विचार‑विनिमय का मंच बनेगा, जिससे सतत विकास, नवाचार और समावेशी प्रगति में स्वदेशी ज्ञान का उपयोग हो सके।

परिसंवाद के अंत में सरकार के कार्यक्रमों और शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को दिशा‑निर्देश देने हेतु सिफ़ारिशें तैयार की जाएँगी, जिससे यह सिद्ध हो सके कि भारत की प्राचीन बौद्धिक उपलब्धियां भविष्य की राह में अभी भी प्रासंगिक हैं।
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