🔥 TRENDING गोविंदपुर थाना क्षेत्र के बधोर थाना क्... Meghalaya to install fast EV charging... पुलिस स्मृति दिवस पर नूंह पुलिस के कर्... देहरादून में पूर्व शिक्षकों से भेंट, व... India, Armenia Discuss Bilateral Ties,... Tripura CM Manik Saha inaugurates Mile...
31 Oct 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
Health

सदर अस्पताल जहानाबाद में चिकित्सक कि लापरवाही से युवक कि हुई मौत

✍️ Reporter: Awanish Kumar 🗓 31 Oct 2026, 07:39 AM 👁 14
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

जहानाबाद सदर अस्पताल में इमरजेंसी में चिकित्सकों के अनुपस्थित रहने के कारण युवक कि मौत

जहानाबाद से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट

सदर अस्पताल में डॉक्टरों की कथित लापरवाही से युवक की मौत, परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप

48 डॉक्टरों की पोस्टिंग के बावजूद इमरजेंसी में घंटों चिकित्सक के मौजूद नहीं रहने का आरोप; मौत के बाद पहुंचे सिविल सर्जन ने जताई नाराजगी, अनुपस्थित डॉक्टरों का वेतन काटने और विभागीय कार्रवाई की दी चेतावनी

जहानाबाद। सदर अस्पताल में मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिलने और चिकित्सकों के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। शुक्रवार को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे काको निवासी शैलेश मांझी की मौत के बाद एक बार फिर अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि इमरजेंसी वार्ड में घंटों तक डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे। समय पर चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिलने के कारण मरीज की हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई। हालांकि, मरीज की मौत का वास्तविक कारण चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

परिजनों के अनुसार, शुक्रवार की सुबह करीब नौ बजे शैलेश मांझी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इसके बाद परिवार के लोग उन्हें लेकर सदर अस्पताल पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद काफी देर तक इमरजेंसी वार्ड में कोई चिकित्सक उपलब्ध नहीं था। वे लगातार डॉक्टर की तलाश करते रहे, लेकिन समय पर इलाज शुरू नहीं हो सका। इस दौरान मरीज की स्थिति गंभीर होती चली गई। परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय पर डॉक्टर उपलब्ध होते तो शायद मरीज को बेहतर इलाज मिल सकता था।

बताया जाता है कि दोपहर करीब 12 बजे अस्पताल अधीक्षक डॉ. चंद्रशेखर आजाद अस्पताल पहुंचे। इसके बाद मरीज की जांच कर उसे मृत घोषित कर दिया गया। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। अस्पताल परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। बाद में शव को सरकारी एंबुलेंस से परिजनों के साथ घर भेज दिया गया।

मौत के बाद औचक निरीक्षण करने पहुंचे सिविल सर्जन

मरीज की मौत और डॉक्टरों की अनुपस्थिति की शिकायत के बाद सिविल सर्जन डॉ. हरिश्चंद्र चौधरी सदर अस्पताल पहुंचे और विभिन्न वार्डों के साथ इमरजेंसी वार्ड का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने चिकित्सकों की उपस्थिति और ड्यूटी व्यवस्था की जानकारी ली। डॉक्टरों के निर्धारित समय पर उपलब्ध नहीं रहने की शिकायत पर उन्होंने नाराजगी जताई। सिविल सर्जन ने कहा कि अस्पताल में मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना प्राथमिक जिम्मेदारी है। ड्यूटी में लापरवाही और बिना सूचना अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वाले चिकित्सकों का वेतन काटने की भी कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल में तैनात डॉक्टरों को निर्धारित समय पर अपनी ड्यूटी पर उपस्थित रहना होगा। मरीजों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

48 डॉक्टरों की पोस्टिंग, फिर भी इमरजेंसी में डॉक्टर की कमी क्यों?

गौरतलब है कि सदर अस्पताल में करीब 48 चिकित्सकों की पोस्टिंग बताई जा रही है। इसके बावजूद इमरजेंसी वार्ड में घंटों तक डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहने की शिकायत सामने आना अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। दो दिन पहले भी एक लड़की की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टर की अनुपस्थिति और इलाज में देरी की शिकायत की थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से मरीजों और उनके परिजनों में चिंता बढ़ रही है।

इसके अलावा अस्पताल में कुछ चिकित्सकों द्वारा छुट्टी देने की प्रक्रिया में कथित अनियमितता और पैसे के लेन-देन के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सदर अस्पताल में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की पोस्टिंग है, तो इमरजेंसी में मरीजों को समय पर डॉक्टर क्यों नहीं मिल रहे हैं? ड्यूटी रोस्टर की नियमित निगरानी कौन कर रहा है और लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही किसकी तय होगी? सिविल सर्जन की कार्रवाई की चेतावनी के बाद अब यह देखना होगा कि अस्पताल की व्यवस्था में कितना सुधार होता है और मरीजों को समय पर इलाज की सुविधा मिल पाती है या नहीं।
बाइट सिविल सर्जन हरीशचन्द्र चौधरी
📲Get App