• सरवैया में बोले बृजभूषण शरण सिंह- 'जो आज सोचोगे, भविष्य में वही बनोगे'
• इंसान के अंगूठे का निशान न मिलना ईश्वर का चमत्कार"- सरवैया पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह
सरवैया के मां पूर्वी देवी मंदिर पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह, मेला प्रबंधक सतीश त्रिपाठी ने किया भव्य स्वागत; युवाओं को दिया सफलता और स्वास्थ्य का मूलमंत्र
सरवैया:
क्षेत्र की जनता का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ, जब पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह सरवैया स्थित प्रसिद्ध मां पूर्वी देवी मंदिर पहुंचे। उनके आगमन पर मेला प्रबंधक सतीश त्रिपाठी द्वारा फूल-मालाओं और गाजे-बाजे के साथ उनका जोरदार व भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान मां पूर्वी देवी के दर्शन के बाद उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय और विशेषकर छात्र-छात्राओं को संबोधित किया।
जो आज सोचोगे, वही कल बनोगे
अपने चिरपरिचित अंदाज में युवाओं में जोश भरते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, "पढ़ने-लिखने वाले बच्चों, ध्यान से सुनना। आज आप वही हो जो आपने पहले कभी सोचा था। आज मैं भी वही हूँ जो मैंने कभी सोचा था। और याद रखना, आगे भविष्य में भी आप वही बनोगे जो आज सोच रहे हो।" उन्होंने युवाओं को प्रेरित करने के लिए प्रसिद्ध पंक्तियां भी दोहराईं—"है कौन सा काम जग में, जो टिक सके आदमी के मग में।"
पढ़ाई से पहले स्वास्थ्य और खेलकूद जरूरी
शिक्षा और जीवन में प्राथमिकताओं पर बात करते हुए उन्होंने एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में पढ़ाई दूसरे नंबर पर है, जबकि पहले नंबर पर स्वास्थ्य और खेलकूद होना चाहिए। उन्होंने तर्क देते हुए कहा, "स्वस्थ शरीर के अंदर ही स्वस्थ दिमाग का वास होता है। अगर शरीर ही स्वस्थ नहीं रहेगा, तो पढ़ाई कैसे होगी?"
ईश्वर की अनोखी रचना है मनुष्य
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने विज्ञान और अध्यात्म का अनूठा उदाहरण देते हुए कहा कि संसार में अरबों-खरबों लोग हैं, लेकिन किसी भी एक व्यक्ति के अंगूठे का निशान (थम्ब प्रिंट) दूसरे व्यक्ति से नहीं मिलता। यह ईश्वर का सबसे बड़ा चमत्कार है कि उन्होंने हर इंसान को अनोखा बनाया है।
इस अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य लोग, युवा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सरवैया:
क्षेत्र की जनता का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ, जब पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह सरवैया स्थित प्रसिद्ध मां पूर्वी देवी मंदिर पहुंचे। उनके आगमन पर मेला प्रबंधक सतीश त्रिपाठी द्वारा फूल-मालाओं और गाजे-बाजे के साथ उनका जोरदार व भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान मां पूर्वी देवी के दर्शन के बाद उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय और विशेषकर छात्र-छात्राओं को संबोधित किया।
जो आज सोचोगे, वही कल बनोगे
अपने चिरपरिचित अंदाज में युवाओं में जोश भरते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, "पढ़ने-लिखने वाले बच्चों, ध्यान से सुनना। आज आप वही हो जो आपने पहले कभी सोचा था। आज मैं भी वही हूँ जो मैंने कभी सोचा था। और याद रखना, आगे भविष्य में भी आप वही बनोगे जो आज सोच रहे हो।" उन्होंने युवाओं को प्रेरित करने के लिए प्रसिद्ध पंक्तियां भी दोहराईं—"है कौन सा काम जग में, जो टिक सके आदमी के मग में।"
पढ़ाई से पहले स्वास्थ्य और खेलकूद जरूरी
शिक्षा और जीवन में प्राथमिकताओं पर बात करते हुए उन्होंने एक बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में पढ़ाई दूसरे नंबर पर है, जबकि पहले नंबर पर स्वास्थ्य और खेलकूद होना चाहिए। उन्होंने तर्क देते हुए कहा, "स्वस्थ शरीर के अंदर ही स्वस्थ दिमाग का वास होता है। अगर शरीर ही स्वस्थ नहीं रहेगा, तो पढ़ाई कैसे होगी?"
ईश्वर की अनोखी रचना है मनुष्य
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने विज्ञान और अध्यात्म का अनूठा उदाहरण देते हुए कहा कि संसार में अरबों-खरबों लोग हैं, लेकिन किसी भी एक व्यक्ति के अंगूठे का निशान (थम्ब प्रिंट) दूसरे व्यक्ति से नहीं मिलता। यह ईश्वर का सबसे बड़ा चमत्कार है कि उन्होंने हर इंसान को अनोखा बनाया है।
इस अवसर पर क्षेत्र के कई गणमान्य लोग, युवा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।