सरकारी योजना
सरकार कहती है आम जनता ग़रीब महिलाएँ कर्ज़े से परेशान नहीं है? क्या आप भी क़र्ज़े से परेशान हैं? आइए संगठित होकर अपनी आवाज़ बुलंद करें और सरक
संसद में भी कई सांसदों ने सवाल उठाए हैं? सरकार फिर भी गरीबों के क़र्ज़े माफ़ी पर चुप है..सरकार ने धन्नासेठों का 15 लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया है,तो आम जनता किसानों का भी क़र्ज
सरकार कहती है आम जनता ग़रीब महिलाएँ कर्ज़े से परेशान नहीं है? क्या आप भी क़र्ज़े से परेशान हैं? आइए संगठित होकर अपनी आवाज़ बुलंद करें और सरकार तक मिलकर अपनी आवाज़ पहुँचाएँ…
संसद में भी कई सांसदों ने सवाल उठाए हैं? सरकार फिर भी गरीबों के क़र्ज़े माफ़ी पर चुप है..सरकार ने धन्नासेठों का 15 लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया है,तो आम जनता किसानों का भी क़र्ज़ा माफ़ होना चाहिए? अमीरों के क़र्ज़े माफ़ और गरीबों किसानों के घर जमीन नीलाम क्यों? आइए संगठित होकर अपनी आवाज़ बुलंद करें और सरकार तक मिलकर पहुँचाएँ…अपनी अपनी ज़िम्मेदारी को पूरा करें?
कर्जे के कारण कोई भी बैंक/रिकवरी एजेंट/सूदखोर जबरदस्ती परेशान/प्रताड़ित करे/धमकी दे तो डरिए नहीं रिकॉर्डिंग/वीडियो रिकॉर्डिंग कीजिए शिकायत दर्ज कराइए? कोई भी ग़लत कदम नहीं उठाइए..क़र्ज़ा लेना कोई अपराध नहीं है? आर्थिक स्थिति ख़राब होने पर EMI/लोन न चुकाना भी अपराध नहीं है! सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा? : EMI/लोन चुकाने से ज़्यादा जरूरी पहले परिवार का भरण पोषण करना है! अपने को अपराधी/दोषी नहीं मानिए? अपराधी वो है जो RBI के गाइडलाइन का उल्लंघन करता है,13% सालाना दर से अधिक ब्याज अवैध तरीके से जबरन वसूली करना जुर्म है अपराध है! संगठित होकर अपनी आवाज़ सरकार तक पहुँचाइए..क़र्ज़ा मुक्ति अभियान का हिस्सा बनिए..
संसद में भी कई सांसदों ने सवाल उठाए हैं? सरकार फिर भी गरीबों के क़र्ज़े माफ़ी पर चुप है..सरकार ने धन्नासेठों का 15 लाख करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया है,तो आम जनता किसानों का भी क़र्ज़ा माफ़ होना चाहिए? अमीरों के क़र्ज़े माफ़ और गरीबों किसानों के घर जमीन नीलाम क्यों? आइए संगठित होकर अपनी आवाज़ बुलंद करें और सरकार तक मिलकर पहुँचाएँ…अपनी अपनी ज़िम्मेदारी को पूरा करें?
कर्जे के कारण कोई भी बैंक/रिकवरी एजेंट/सूदखोर जबरदस्ती परेशान/प्रताड़ित करे/धमकी दे तो डरिए नहीं रिकॉर्डिंग/वीडियो रिकॉर्डिंग कीजिए शिकायत दर्ज कराइए? कोई भी ग़लत कदम नहीं उठाइए..क़र्ज़ा लेना कोई अपराध नहीं है? आर्थिक स्थिति ख़राब होने पर EMI/लोन न चुकाना भी अपराध नहीं है! सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा? : EMI/लोन चुकाने से ज़्यादा जरूरी पहले परिवार का भरण पोषण करना है! अपने को अपराधी/दोषी नहीं मानिए? अपराधी वो है जो RBI के गाइडलाइन का उल्लंघन करता है,13% सालाना दर से अधिक ब्याज अवैध तरीके से जबरन वसूली करना जुर्म है अपराध है! संगठित होकर अपनी आवाज़ सरकार तक पहुँचाइए..क़र्ज़ा मुक्ति अभियान का हिस्सा बनिए..