🔥 TRENDING नाली विवाद मे दो पक्षों में खूनी संघर... સાયખા GIDCમાં રિએક્ટર બ્લાસ્ટ: સિન્ઝીલ... Ranabaali Surpasses ₹15 Cr on Day 2, B... Drishyam 3 Day 16 Box Office: Ajay Dev... Haryana: Four Charged Over Illegal Bur... Kapil Sibal Says Modi Government Turns...
18 Oct 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: इंटरनेट का इस्तेमाल हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: इंटरनेट का इस्तेमाल हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार

✍️ Reporter: Amit Kukreja 🗓 18 Oct 2026, 02:40 AM 👁 14
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि इंटरनेट तक पहुंच और उसका इस्तेमाल संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(ए) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) के तहत प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। इस अधिकार में बच्चे भी शामिल हैं।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि इंटरनेट तक पहुंच और उसका इस्तेमाल संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(ए) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) के तहत प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM) का पता लगाने और हटाने से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान की।

पीठ ने कहा कि इस अधिकार में बच्चे भी शामिल हैं और उनकी उम्र चाहे जो भी हो, उन्हें इंटरनेट से पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने जोर देकर कहा कि बच्चों को इंटरनेट इस्तेमाल करने के अधिकार से पूरी तरह वंचित करना उतना ही बेतुका होगा, जितना यह कहना कि एक निश्चित उम्र से कम बच्चों की अंतरात्मा की रक्षा करने या उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को महत्व देने की जरूरत नहीं है।

अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि बच्चों की सुरक्षा और उनकी स्वतंत्रता एक-दूसरे के विरोध में नहीं हैं, बल्कि बच्चे इन दोनों के हकदार हैं। अदालत ने केंद्र सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों को बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM) को रोकने के लिए और मजबूत तकनीकी व्यवस्था बनाने के निर्देश भी दिए।
📲Get App