📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / World Economic Forum on Flickr / Eric Miller
राजनीति
सैम पित्रोदा ने कहा, भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएँ ‘कैद’ हो गई हैं
✍️ National Herald
🗓 28 अग. 2026, 04:38 PM
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वृद्ध तकनीकी विशेषज्ञ सैम पित्रोदा ने नेशनल हरल्ड को बताया कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएँ अब ‘कैद’ हो गई हैं।
सैम पित्रोदा, पूर्व प्रधानमंत्री सलाहकार और भारत के दूरसंचार क्षेत्र के अग्रणी, ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के बारे में गंभीर टिप्पणी की।
नेशनल हरल्ड को साक्षात्कार में पित्रोदा ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएँ “कैद” हो गई हैं, जिससे उनका स्वतंत्र कार्य करने की क्षमता घट गई है।
उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की स्थिति सार्वजनिक विश्वास को कमजोर कर सकती है और संविधानिक संतुलन को बिगाड़ सकती है।
यह बयान संस्थागत स्वायत्तता और नीति निर्माण में नौकरशाही की भूमिका पर चल रहे बहस के बीच आया है, पर पित्रोदा ने कोई विशेष उदाहरण नहीं दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी लोकतांत्रिक मानदंडों की रक्षा पर नई चर्चा को जन्म दे सकती है, जबकि अभी तक किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं मिला।
नेशनल हरल्ड को साक्षात्कार में पित्रोदा ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएँ “कैद” हो गई हैं, जिससे उनका स्वतंत्र कार्य करने की क्षमता घट गई है।
उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की स्थिति सार्वजनिक विश्वास को कमजोर कर सकती है और संविधानिक संतुलन को बिगाड़ सकती है।
यह बयान संस्थागत स्वायत्तता और नीति निर्माण में नौकरशाही की भूमिका पर चल रहे बहस के बीच आया है, पर पित्रोदा ने कोई विशेष उदाहरण नहीं दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी लोकतांत्रिक मानदंडों की रक्षा पर नई चर्चा को जन्म दे सकती है, जबकि अभी तक किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं मिला।