स्थानीय
सिकंदराराऊ में नगर पालिका की कूड़ा व्यवस्था बेपटरी, वर्षों बाद भी चालू नहीं हुआ डंपिंग सेंटर
सिकंदराराऊ में नगर पालिका की कूड़ा निस्तारण व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वर्षों बाद भी डंपिंग सेंटर चालू नहीं हो पाया है। कुलदीप नगर रोड, एटा रोड और कई जगहों पर सड़क किनारे कूड़े के ढेर लगे हैं, जिससे गंदगी और बदबू से जनता परेशान है। सवाल है कि जब डंपिंग सेंटर तक जाने का रास्ता ही तैयार नहीं, तो जगह चुनने से पहले पूरी तैयारी क्यों नहीं की गई?
हाथरस जनपद के सिकंदराराऊ नगर पालिका की कूड़ा निस्तारण व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
वर्षों बीत जाने के बाद भी डंपिंग सेंटर चालू नहीं हो पाया है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे JCB और ट्रैक्टरों से कूड़े को इधर उधर किया जा रहा है, लेकिन स्थाई समाधान कहीं नजर नहीं आ रहा।
नगर के पुरदिल नगर रोड, एटा रोड और कुलदीप नगर रोड पर सड़क किनारे कूड़े के बड़े बड़े ढेर लगे हुए हैं। सड़कों के किनारे गंदगी और बदबू से स्थानीय जनता और राहगीरों का जीना मुहाल हो गया है। आवारा जानवर कूड़े में मुंह मार रहे हैं और बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब डंपिंग सेंटर तक जाने का रास्ता ही तैयार नहीं है और जमीन का मामला इतने समय से लंबित पड़ा है, तो जगह चुनने से पहले पूरी तैयारी क्यों नहीं की गई? फाइलों में ही नगर पालिका की कार्ययोजना क्यों सिमटी हुई है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जमीन का मामला इतने समय से लंबित है तो समाधान की समय सीमा क्या है? आखिर कब तक फाइलों और आश्वासनों के भरोसे काम चलेगा?
अब जनता पूछ रही है कि नगर को कूड़े से मुक्ति कब मिलेगी? नगर पालिका कब बनाएगी स्थाई व्यवस्था? अब जनता को जवाब भी चाहिए और समाधान भी।
वर्षों बीत जाने के बाद भी डंपिंग सेंटर चालू नहीं हो पाया है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे JCB और ट्रैक्टरों से कूड़े को इधर उधर किया जा रहा है, लेकिन स्थाई समाधान कहीं नजर नहीं आ रहा।
नगर के पुरदिल नगर रोड, एटा रोड और कुलदीप नगर रोड पर सड़क किनारे कूड़े के बड़े बड़े ढेर लगे हुए हैं। सड़कों के किनारे गंदगी और बदबू से स्थानीय जनता और राहगीरों का जीना मुहाल हो गया है। आवारा जानवर कूड़े में मुंह मार रहे हैं और बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब डंपिंग सेंटर तक जाने का रास्ता ही तैयार नहीं है और जमीन का मामला इतने समय से लंबित पड़ा है, तो जगह चुनने से पहले पूरी तैयारी क्यों नहीं की गई? फाइलों में ही नगर पालिका की कार्ययोजना क्यों सिमटी हुई है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जमीन का मामला इतने समय से लंबित है तो समाधान की समय सीमा क्या है? आखिर कब तक फाइलों और आश्वासनों के भरोसे काम चलेगा?
अब जनता पूछ रही है कि नगर को कूड़े से मुक्ति कब मिलेगी? नगर पालिका कब बनाएगी स्थाई व्यवस्था? अब जनता को जवाब भी चाहिए और समाधान भी।