📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Original: SVKMBFLY; this edit: MPF
स्थानीय
राजस्थान के संकटग्रस्त गोडावण की री‑वाइल्डिंग रामदेवरा में शुरू
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 04 अक्टू. 2026, 09:15 AM
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केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने गोडावण एवियरी और सॉफ्ट रिलीज सेंटर का वर्चुअल उद्घाटन किया, जिससे रामदेवरा में संकटग्रस्त गोडावण को फिर से प्राकृतिक आवास में स्थापित करने की पहल शुरू हुई।
राजस्थान सरकार ने थार के रेगिस्तानी शहर रामदेवरा में राज्य पक्षी गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) की री‑वाइल्डिंग योजना शुरू की है। यह पहल संकटग्रस्त पक्षियों को नियंत्रित वातावरण में पालने और बाद में उनके प्राकृतिक आवास में फिर से स्थापित करने का लक्ष्य रखती है।
गोडावण को अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण संघ (IUCN) ने ‘क्रिटिकली एंडेंजरड’ वर्ग में रखा है; इसके जनसंख्या में आवास क्षय, शिकार और बिजली के तारों से टकराव के कारण भारी गिरावट आई है, और राजस्थान में इसके कुछ ही बचे हैं।
परियोजना के तहत रामदेवरा के पवित्र स्थल के पास एक विशेष गोडावण एवियरी और सॉफ्ट रिलीज सेंटर बनाया गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन सुविधाओं का वर्चुअल उद्घाटन किया, जिससे अर्द्ध‑शुष्क क्षेत्रों में वन्यजीव पुनर्स्थापना के लिए केंद्र सरकार का समर्थन स्पष्ट हुआ।
सॉफ्ट रिलीज प्रक्रिया में पाले गए बस्टर्ड को पहले एक अर्ध‑प्राकृतिक enclosure में अभ्यस्त किया जाएगा, फिर घास के बाड़े वाले क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा जो उनके पुराने आवास की नकल करते हैं। राज्य वन विभाग और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया जैसे NGOs GPS टैग के माध्यम से पक्षियों की निगरानी करेंगे।
पहले समूह के पक्षियों को अगले वर्ष की शुरुआत में मुक्त करने की योजना है, जिससे यह कार्यक्रम थार पारिस्थितिकी तंत्र में समान संरक्षण प्रयासों के लिए एक मॉडल बन सके।
गोडावण को अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण संघ (IUCN) ने ‘क्रिटिकली एंडेंजरड’ वर्ग में रखा है; इसके जनसंख्या में आवास क्षय, शिकार और बिजली के तारों से टकराव के कारण भारी गिरावट आई है, और राजस्थान में इसके कुछ ही बचे हैं।
परियोजना के तहत रामदेवरा के पवित्र स्थल के पास एक विशेष गोडावण एवियरी और सॉफ्ट रिलीज सेंटर बनाया गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इन सुविधाओं का वर्चुअल उद्घाटन किया, जिससे अर्द्ध‑शुष्क क्षेत्रों में वन्यजीव पुनर्स्थापना के लिए केंद्र सरकार का समर्थन स्पष्ट हुआ।
सॉफ्ट रिलीज प्रक्रिया में पाले गए बस्टर्ड को पहले एक अर्ध‑प्राकृतिक enclosure में अभ्यस्त किया जाएगा, फिर घास के बाड़े वाले क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा जो उनके पुराने आवास की नकल करते हैं। राज्य वन विभाग और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया जैसे NGOs GPS टैग के माध्यम से पक्षियों की निगरानी करेंगे।
पहले समूह के पक्षियों को अगले वर्ष की शुरुआत में मुक्त करने की योजना है, जिससे यह कार्यक्रम थार पारिस्थितिकी तंत्र में समान संरक्षण प्रयासों के लिए एक मॉडल बन सके।