📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harvard Atlas of Economic Complexity
बिज़नेस
रिकॉर्ड ग्रॉस FDI प्रवाह पर रिपैट्रीएशन व विदेशी निवेश का दबाव
✍️ Business Standard
🗓 15 अक्टू. 2026, 07:36 AM
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भारत के ग्रॉस विदेशी प्रत्यक्ष निवेश ने रिकॉर्ड स्तर हासिल किया, परन्तु लाभ की बड़ी रिटर्न और विदेशी परियोजनाओं में निवेश ने शुद्ध प्रवाह को घटा दिया, बिजनेस स्टैंडर्ड ने बताया।
भारत का ग्रॉस विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) हालिया आंकड़ों के अनुसार ऐतिहासिक ऊँचाई पर पहुँच गया है, जैसा कि बिजनेस स्टैंडर्ड ने बताया। यह वृद्धि विदेशी निवेशकों के देश की विकास संभावनाओं और नीति माहौल में भरोसे को दर्शाती है।
हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर लाभ की रिटर्न (रिपैट्रीएशन) के कारण शुद्ध प्रवाह में कमी आई है। कंपनियाँ भारत में अर्जित मुनाफे को अपने मूल देशों में भेज रही हैं, जिससे कुल प्रवाह घटता है।
ग्रॉस प्रवाह के साथ-साथ “ओवरसीज बेट्स” यानी भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किए गए निवेश भी शुद्ध FDI को घटा रहे हैं। ये क्रॉस‑बॉर्डर निवेश वह पूँजी बाहर ले जाते हैं, जो घरेलू अर्थव्यवस्था में रह सकती थी।
विश्लेषकों का मानना है कि रिकॉर्ड ग्रॉस इनफ़्लो निवेश आकर्षण का संकेत है, परन्तु रिटर्न और विदेशों में निवेश की मिलीजुली प्रभाव से भारत के भुगतान संतुलन पर असर पड़ सकता है, जब तक कि नीति उपाय या पुनर्निवेश प्रोत्साहन नहीं बढ़ाए जाते।
हालाँकि, रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर लाभ की रिटर्न (रिपैट्रीएशन) के कारण शुद्ध प्रवाह में कमी आई है। कंपनियाँ भारत में अर्जित मुनाफे को अपने मूल देशों में भेज रही हैं, जिससे कुल प्रवाह घटता है।
ग्रॉस प्रवाह के साथ-साथ “ओवरसीज बेट्स” यानी भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किए गए निवेश भी शुद्ध FDI को घटा रहे हैं। ये क्रॉस‑बॉर्डर निवेश वह पूँजी बाहर ले जाते हैं, जो घरेलू अर्थव्यवस्था में रह सकती थी।
विश्लेषकों का मानना है कि रिकॉर्ड ग्रॉस इनफ़्लो निवेश आकर्षण का संकेत है, परन्तु रिटर्न और विदेशों में निवेश की मिलीजुली प्रभाव से भारत के भुगतान संतुलन पर असर पड़ सकता है, जब तक कि नीति उपाय या पुनर्निवेश प्रोत्साहन नहीं बढ़ाए जाते।