📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Biswarup Ganguly
मनोरंजन
राजस्थान के टेराकोटा कलाकार चंद्रशेखर सेन को ‘माइ एंटायर वर्ल्ड‑I’ के लिए राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 28 सित. 2026, 06:31 PM
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राजस्थान के टेराकोटा शिल्पकार चंद्रशेखर सेन को 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी 2026 में ‘माइ एंटायर वर्ल्ड‑I’ के लिए राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार मिला है।
राजस्थान के प्रसिद्ध टेराकोटा कलाकार चंद्रशेखर सेन को 2026 में आयोजित होने वाली 65वीं राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में राष्ट्रीय अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उनके “माइ एंटायर वर्ल्ड‑I” नामक टेराकोटा शिल्प को दिया गया है, जो जटिल कारीगरी और समकालीन विषयवस्तु को दर्शाता है।
राष्ट्रीय अकादमी ऑफ आर्ट्स द्वारा आयोजित इस वार्षिक प्रदर्शनी में पुरस्कार प्राप्तकर्ता का चयन कलात्मक योग्यता, नवाचार और सांस्कृतिक प्रासंगिकता के आधार पर किया जाता है। सेन का कार्य देश भर से आए प्रस्तुतियों में अपनी तकनीकी निपुणता और भावनात्मक अभिव्यक्ति के कारण अलग दिखा।
यह सम्मान प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में प्रदान किया जाएगा, जिससे राजस्थान की समृद्ध टेराकोटा परंपरा को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलेगी और कलाकार की आधुनिक भारतीय शिल्प में योगदान को सराहा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का मान्यता कलाकारों को व्यापक प्रदर्शनियों, कमीशन और सहयोग के अवसर प्रदान करती है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और भी सुदृढ़ होती है।
सेन की उपलब्धि क्षेत्रीय शिल्पों के राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सम्मान को उजागर करती है, जिससे उभरते कारीगरों को पारम्परिक माध्यमों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरणा मिलती है।
राष्ट्रीय अकादमी ऑफ आर्ट्स द्वारा आयोजित इस वार्षिक प्रदर्शनी में पुरस्कार प्राप्तकर्ता का चयन कलात्मक योग्यता, नवाचार और सांस्कृतिक प्रासंगिकता के आधार पर किया जाता है। सेन का कार्य देश भर से आए प्रस्तुतियों में अपनी तकनीकी निपुणता और भावनात्मक अभिव्यक्ति के कारण अलग दिखा।
यह सम्मान प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में प्रदान किया जाएगा, जिससे राजस्थान की समृद्ध टेराकोटा परंपरा को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलेगी और कलाकार की आधुनिक भारतीय शिल्प में योगदान को सराहा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का मान्यता कलाकारों को व्यापक प्रदर्शनियों, कमीशन और सहयोग के अवसर प्रदान करती है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और भी सुदृढ़ होती है।
सेन की उपलब्धि क्षेत्रीय शिल्पों के राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते सम्मान को उजागर करती है, जिससे उभरते कारीगरों को पारम्परिक माध्यमों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरणा मिलती है।