📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Tisha Mukherjee
देश
राजस्थान हाई कोर्ट ने जवाई लेपर्ड आवास के चारों ओर 1 किमी अंतरिम सुरक्षा क्षेत्र घोषित किया
✍️ Live Law
🗓 08 सित. 2026, 06:18 PM
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राजस्थान हाई कोर्ट ने जवाई में लेपर्ड आवास के चारों ओर 1 किमी का अंतरिम नियामक क्षेत्र स्थापित कर कुछ गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया है।
राजस्थान हाई कोर्ट ने पाली जिले के जवाई क्षेत्र में लेपर्ड आवास के चारों ओर एक किलोमीटर का अंतरिम नियामक क्षेत्र स्थापित करने का आदेश दिया है। यह कदम मानव‑वन्यजीव टकराव को कम करने और इस अर्ध‑शुष्क क्षेत्र में बढ़ते लेपर्ड जनसंख्या की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।
आदेश के तहत निर्धारित सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण, खनन, पर्यटन सुविधाओं का विकास या अन्य बाधक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। वन विभाग को इस क्षेत्र की निगरानी करने और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
कोर्ट ने राज्य वन्यजीव विभाग को 30 दिनों के भीतर आवास संरक्षण उपायों और स्थानीय समुदायों के सहयोग के लिए विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया। स्थानीय निवासियों और पर्यटन ऑपरेटरों को भी इस प्रतिबंध का समर्थन करने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए सहयोग करने को कहा गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतरिम क्षेत्र एक अस्थायी उपाय है, जिसके बाद अंतिम निर्णय के आधार पर स्थायी नियमावली बन सकती है। यह निर्णय भारत में पर्यावरणीय न्याय के क्षेत्र में न्यायालय की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ शीर्ष शिकारियों और मानव बस्तियों का सहअस्तित्व है।
आदेश के तहत निर्धारित सीमा के भीतर किसी भी प्रकार का निर्माण, खनन, पर्यटन सुविधाओं का विकास या अन्य बाधक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। वन विभाग को इस क्षेत्र की निगरानी करने और नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।
कोर्ट ने राज्य वन्यजीव विभाग को 30 दिनों के भीतर आवास संरक्षण उपायों और स्थानीय समुदायों के सहयोग के लिए विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया। स्थानीय निवासियों और पर्यटन ऑपरेटरों को भी इस प्रतिबंध का समर्थन करने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए सहयोग करने को कहा गया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतरिम क्षेत्र एक अस्थायी उपाय है, जिसके बाद अंतिम निर्णय के आधार पर स्थायी नियमावली बन सकती है। यह निर्णय भारत में पर्यावरणीय न्याय के क्षेत्र में न्यायालय की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ शीर्ष शिकारियों और मानव बस्तियों का सहअस्तित्व है।