📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Shiraz Husain
शिक्षा
राजस्थान हाईकोर्ट ने सभी न्यायिक परिसरों में शिशु गृह की मंजूरी दी
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 18 अक्टू. 2026, 10:00 AM
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राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने राज्य के न्यायिक परिसरों में 6 महीने से 8 साल के बच्चों के लिए शिशु गृह स्थापित करने का निर्देश जारी किया है।
राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन ने राज्य के सभी न्यायिक परिसरों में शिशु गृह स्थापित करने का आधिकारिक निर्देश जारी किया है। यह कदम कोर्ट कर्मचारियों, वकीलों और आगंतुकों के बच्चों के लिए एक सुरक्षित देखरेख वाला वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिससे माता‑पिता को कोर्ट के समय में बाहरी देखभाल की व्यवस्था नहीं करनी पड़े।
निर्देश के अनुसार प्रत्येक शिशु गृह में छह महीने से आठ साल तक के बच्चों को प्रवेश मिलेगा। सुविधाओं में बुनियादी बैठने की व्यवस्था, खेल क्षेत्र और आयु‑अनुसार देखरेख शामिल होगी, जबकि संचालन के विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
यह पहल भारतीय न्यायालयों में कार्यस्थल समर्थन सेवाओं को सुदृढ़ करने के व्यापक प्रवृत्ति के अनुरूप है और कानूनी पेशेवरों को काम और परिवार के बीच संतुलन बनाने की चुनौतियों को स्वीकार करती है। कार्यान्वयन की देखरेख हाईकोर्ट के प्रशासनिक विभाग द्वारा की जाएगी, जो प्रत्येक न्यायालय के साथ समन्वय कर इस निर्देश को लागू करेगा।
बार एसोसिएशन और कोर्ट कर्मचारियों सहित कई हितधारकों ने इस कदम का स्वागत किया है, यह मानते हुए कि ऑन‑साइट शिशु गृह से उपस्थिति में सुधार और माता‑पिता की अनुपस्थिति के कारण होने वाले विलंब में कमी आएगी। हाईकोर्ट ने अभी तक कार्यान्वयन की समयसीमा नहीं बताई है, पर यह निर्देश राजस्थान में न्यायालयीय बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है।
निर्देश के अनुसार प्रत्येक शिशु गृह में छह महीने से आठ साल तक के बच्चों को प्रवेश मिलेगा। सुविधाओं में बुनियादी बैठने की व्यवस्था, खेल क्षेत्र और आयु‑अनुसार देखरेख शामिल होगी, जबकि संचालन के विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
यह पहल भारतीय न्यायालयों में कार्यस्थल समर्थन सेवाओं को सुदृढ़ करने के व्यापक प्रवृत्ति के अनुरूप है और कानूनी पेशेवरों को काम और परिवार के बीच संतुलन बनाने की चुनौतियों को स्वीकार करती है। कार्यान्वयन की देखरेख हाईकोर्ट के प्रशासनिक विभाग द्वारा की जाएगी, जो प्रत्येक न्यायालय के साथ समन्वय कर इस निर्देश को लागू करेगा।
बार एसोसिएशन और कोर्ट कर्मचारियों सहित कई हितधारकों ने इस कदम का स्वागत किया है, यह मानते हुए कि ऑन‑साइट शिशु गृह से उपस्थिति में सुधार और माता‑पिता की अनुपस्थिति के कारण होने वाले विलंब में कमी आएगी। हाईकोर्ट ने अभी तक कार्यान्वयन की समयसीमा नहीं बताई है, पर यह निर्देश राजस्थान में न्यायालयीय बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है।