📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Shiraz Husain
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राजस्थान हाईकोर्ट ने एक हफ्ते में जारी की चौथी तबादला सूची, 16 न्यायिक अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 01 अक्टू. 2026, 07:45 AM
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राजस्थान हाईकोर्ट ने एक हफ्ते में चौथी तबादला सूची जारी की, जिसमें 16 न्यायिक अधिकारियों का तबादला और आठ जिलों में नए प्रिंसिपल जज नियुक्त किए गए।
राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासनिक विभाग ने एक हफ्ते में चौथी तबादला सूची जारी की, जिसमें कुल 16 न्यायिक अधिकारियों को नई जगहों पर तैनात किया गया है। यह सूची सोमवार को प्रकाशित हुई और न्यायिक कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए नियमित प्रशासनिक पुनर्संरचना को दर्शाती है।
साथ ही, इस आदेश में आठ प्रमुख न्यायिक जिलों के लिए नए प्रिंसिपल जजों की नियुक्ति भी शामिल है। इन बदलावों का उद्देश्य मामलों के बोझ को संतुलित करना और उच्च मामलों वाले अदालतों में नई नेतृत्व शक्ति लाना है।
हाईकोर्ट के सचिवालय ने बताया कि यह तबादला स्थापित नियमों के अनुसार किया गया है और प्रभावित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी नई जिम्मेदारियां संभालनी होंगी। अब तक कोई आपत्ति या अपील दर्ज नहीं हुई है।
वकीलों और स्थानीय बार एसोसिएशन सहित सभी हितधारकों को इन परिवर्तनों की सूचना दे दी गई है और संक्रमण अवधि में अदालत के कामकाज में कोई रुकावट न आए, इसके लिए सहयोग की अपेक्षा की जा रही है।
यह नवीनतम पुनर्संरचना राजस्थान के न्यायिक प्रशासन को प्रभावी बनाये रखने के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है, जिससे राज्य की कानूनी प्रणाली की बदलती जरूरतों के अनुसार कर्मियों का उचित वितरण सुनिश्चित हो सके।
साथ ही, इस आदेश में आठ प्रमुख न्यायिक जिलों के लिए नए प्रिंसिपल जजों की नियुक्ति भी शामिल है। इन बदलावों का उद्देश्य मामलों के बोझ को संतुलित करना और उच्च मामलों वाले अदालतों में नई नेतृत्व शक्ति लाना है।
हाईकोर्ट के सचिवालय ने बताया कि यह तबादला स्थापित नियमों के अनुसार किया गया है और प्रभावित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी नई जिम्मेदारियां संभालनी होंगी। अब तक कोई आपत्ति या अपील दर्ज नहीं हुई है।
वकीलों और स्थानीय बार एसोसिएशन सहित सभी हितधारकों को इन परिवर्तनों की सूचना दे दी गई है और संक्रमण अवधि में अदालत के कामकाज में कोई रुकावट न आए, इसके लिए सहयोग की अपेक्षा की जा रही है।
यह नवीनतम पुनर्संरचना राजस्थान के न्यायिक प्रशासन को प्रभावी बनाये रखने के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है, जिससे राज्य की कानूनी प्रणाली की बदलती जरूरतों के अनुसार कर्मियों का उचित वितरण सुनिश्चित हो सके।