📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / TrendSPLEND
नौकरी
राजस्थान हाईकोर्ट ने 11 साल पुराना बर्खास्तगी आदेश रद्द, सूचना सहायकों को मिली राहत
✍️ Amar Ujala · Jodhpur
🗓 13 अक्टू. 2026, 09:31 PM
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राजस्थान हाईकोर्ट ने 2012 का वह आदेश रद्द कर दिया जिससे मेघालय के महात्मा गांधी विश्वविद्यालय से पीजीडीसीए करने वाले सूचना सहायकों को सेवा से हटाया गया, जिससे उनकी नौकरी फिर से सुरक्षित हुई।
राजस्थान हाईकोर्ट ने 11 साल पुराना वह सरकारी आदेश रद्द कर दिया है, जिसके तहत महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, मेघालय से पीजीडीसीए करने वाले सूचना सहायकों को सेवा से हटाया गया था। कोर्ट ने कहा कि 2012 में जारी किया गया यह आदेश प्रक्रिया के नियमों का उल्लंघन करता है और इसलिए इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता।
राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत इन सहायकों ने अपने हटाए जाने के बाद न्यायिक उपायों की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया कि बर्खास्तगी मनमानी थी और उनके रोजगार के अधिकारों का उल्लंघन करती है।
अदालत के इस फैसले के बाद इन सहायकों को पुनः नियुक्ति और खोए हुए सेवा लाभों की पुनर्स्थापना का अधिकार मिल गया है। यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि समान पुराने आदेशों की भी न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह निर्णय रोजगार अधिकारों की रक्षा में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है और प्रशासनिक कार्यों को उचित प्रक्रिया के तहत चलाने की आवश्यकता पर बल देता है।
राज्य सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस आदेश के कार्यान्वयन के लिए दिशा‑निर्देश जारी करे, जिससे प्रभावित सूचना सहायकों को उनके पदों पर पुनः स्थापित किया जा सके।
राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत इन सहायकों ने अपने हटाए जाने के बाद न्यायिक उपायों की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया कि बर्खास्तगी मनमानी थी और उनके रोजगार के अधिकारों का उल्लंघन करती है।
अदालत के इस फैसले के बाद इन सहायकों को पुनः नियुक्ति और खोए हुए सेवा लाभों की पुनर्स्थापना का अधिकार मिल गया है। यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि समान पुराने आदेशों की भी न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों ने कहा कि यह निर्णय रोजगार अधिकारों की रक्षा में न्यायपालिका की भूमिका को उजागर करता है और प्रशासनिक कार्यों को उचित प्रक्रिया के तहत चलाने की आवश्यकता पर बल देता है।
राज्य सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस आदेश के कार्यान्वयन के लिए दिशा‑निर्देश जारी करे, जिससे प्रभावित सूचना सहायकों को उनके पदों पर पुनः स्थापित किया जा सके।