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13 अक्टू. 2026•
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राजस्थान हाईकोर्ट ने दुर्लभ रोगियों के इलाज‑जांच मुद्दों पर केंद्र‑राज्य सरकार को तीन हफ्ते में जवाब देने का आदेश
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / TrendSPLEND
स्वास्थ्य

राजस्थान हाईकोर्ट ने दुर्लभ रोगियों के इलाज‑जांच मुद्दों पर केंद्र‑राज्य सरकार को तीन हफ्ते में जवाब देने का आदेश

✍️ Amar Ujala · Jodhpur 🗓 13 अक्टू. 2026, 09:15 PM 👁 10
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राजस्थान हाईकोर्ट ने दुर्लभ बीमारियों, विशेषकर मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के मरीजों को इलाज व जांच में आ रही कठिनाइयों पर केंद्र और राज्य सरकार से तीन हफ्ते में जवाब देने को कहा है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और अन्य दुर्लभ रोगों से पीड़ित मरीजों की शिकायतों को सुना, जिसमें इलाज और जांच की सुविधा में systemic कमी का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ताओं ने निदान में देरी, विशेष उपचार केंद्रों की कमी और वित्तीय सहायता की अपर्याप्तता को प्रमुख समस्याओं के रूप में उजागर किया, जिससे इन रोगियों को समय पर उचित देखभाल नहीं मिल पाती।

इन तथ्यों के प्रकाश में कोर्ट ने केंद्र स्वास्थ्य मंत्रालय और राजस्थान राज्य स्वास्थ्य विभाग दोनों को तीन हफ्ते के भीतर विस्तृत जवाब देने का आदेश दिया। अदालत ने मौजूदा उपायों, शेष योजनाओं और नीतिगत अंतराल के बारे में स्पष्टता माँगी, जो दुर्लभ रोगियों को आवश्यक सेवाएँ प्रदान करने में बाधा बनते हैं।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो आगे की न्यायिक कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें रोगियों के संवैधानिक स्वास्थ्य अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए विशिष्ट आदेश जारी किए जा सकते हैं। यह कदम भारत में दुर्लभ रोगों के उपचार पर बढ़ते न्यायिक निरीक्षण को दर्शाता है।

रोगी अधिकार समूह और चिकित्सा विशेषज्ञों ने कोर्ट के इस सक्रिय रुख का स्वागत किया, इसे दुर्लभ रोग प्रबंधन के लिए बेहतर बुनियादी ढाँचा, वित्तीय व्यवस्था और रेफरल प्रक्रिया स्थापित करने का अवसर माना।

तीन हफ्ते की समय सीमा सरकारों को ठोस कदम बताने का स्पष्ट संकेत देती है, जिससे राजस्थान में दुर्लभ रोगियों की अनदेखी जरूरतों को दूर करने की दिशा में नई पहल की उम्मीद की जा रही है।
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