📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / TrendSPLEND
अपराध
राजस्थान हाईकोर्ट ने पत्नी की जानकारी माँगने को मानसिक क्रूरता कहा
✍️ Amar Ujala · Jaipur
🗓 02 नव. 2026, 09:31 AM
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राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला किया कि पत्नी की निजी जानकारी के लिए आरटीआई, सहकर्मियों पर संबंधों का आरोप और एटीएम से जबरन पैसे निकालना मानसिक क्रूरता है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने यह कहा कि पति द्वारा अपनी पत्नी की निजी जानकारी प्राप्त करने के लिए आरटीआई आवेदन दायर करना, उसके सहकर्मियों पर संबंधों का आरोप लगाना और एटीएम कार्ड से जबरन पैसे निकालवाना, भारतीय कानून के तहत मानसिक क्रूरता माना जाता है। न्यायालय ने इन कार्यों को निरंतर उत्पीड़न और भावनात्मक तनाव के रूप में पहचाना।
निर्णय में बताया गया कि मानसिक क्रूरता में ऐसे लगातार कार्य शामिल होते हैं जो वैवाहिक संबंध में आत्म-सम्मान, सुरक्षा या शांति को नुकसान पहुँचाते हैं। निजी डेटा के लिए आरटीआई का उपयोग, बेबुनियाद आरोप और आर्थिक दबाव, पत्नी को मानसिक रूप से हानि पहुँचाते हैं।
यह फैसला यह संकेत देता है कि ऐसे व्यवहार के आधार पर तलाक की मांग की जा सकती है और कानूनी परिणाम हो सकते हैं। यह भविष्य में समान मामलों में न्यायालय की दिशा-निर्देश स्थापित करेगा, जहाँ वैवाहिक जीवन में गोपनीयता का उल्लंघन किया जाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय व्यक्तिगत गरिमा और गोपनीयता की रक्षा के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है और पारिवारिक कानून में मानसिक क्रूरता के मानदंडों को सुदृढ़ करेगा।
निर्णय में बताया गया कि मानसिक क्रूरता में ऐसे लगातार कार्य शामिल होते हैं जो वैवाहिक संबंध में आत्म-सम्मान, सुरक्षा या शांति को नुकसान पहुँचाते हैं। निजी डेटा के लिए आरटीआई का उपयोग, बेबुनियाद आरोप और आर्थिक दबाव, पत्नी को मानसिक रूप से हानि पहुँचाते हैं।
यह फैसला यह संकेत देता है कि ऐसे व्यवहार के आधार पर तलाक की मांग की जा सकती है और कानूनी परिणाम हो सकते हैं। यह भविष्य में समान मामलों में न्यायालय की दिशा-निर्देश स्थापित करेगा, जहाँ वैवाहिक जीवन में गोपनीयता का उल्लंघन किया जाता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय व्यक्तिगत गरिमा और गोपनीयता की रक्षा के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है और पारिवारिक कानून में मानसिक क्रूरता के मानदंडों को सुदृढ़ करेगा।