📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Bollywood Hungama
अपराध
राजस्थान सरकार ने आईएएस शिखर अग्रवाल की विला खरीद के मामले में जांच को मंजूरी दी
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 30 अक्टू. 2026, 10:45 PM
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राजस्थान सरकार ने आईएएस शिखर अग्रवाल के पद दुरुपयोग, गोयल फैशन को अनुचित लाभ और परिजनों के नाम अनंता रिसॉर्ट में विला खरीद के आरोपों की विस्तृत जांच को मंजूरी दी।
राजस्थान सरकार ने आईएएस शिखर अग्रवाल के खिलाफ विस्तृत जांच को मंजूरी दी है। जांच में यह देखा जाएगा कि क्या उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करके गोयल फैशन को अनुचित लाभ पहुँचाया।
साथ ही, अनंता रिसॉर्ट में बीस विला खरीदने के मामले की भी जांच की जाएगी, जिनका पंजीकरण अधिकारी के परिजनों के नाम पर हुआ है। यह कहा जा रहा है कि इन संपत्तियों की खरीदारी में उपयोग किए गए धन में उनके आधिकारिक आय का मिश्रण हो सकता है।
यह कदम विपक्षी दलों और नागरिक समूहों द्वारा दर्ज की गई शिकायतों के बाद उठाया गया है, जो इस बात का इशारा करते हैं कि ये लेन‑देन सेवा नियमों के विरुद्ध हो सकते हैं और भ्रष्टाचार के संकेत देते हैं। जांच को राज्य कैबिनेट द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी संभालेंगे और रिपोर्ट मुख्य मंत्री को प्रस्तुत की जाएगी।
यदि जांच में दुरुपयोग के प्रमाण मिलते हैं, तो भारतीय प्रशासनिक सेवा (आचरण) नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई, जिसमें निलंबन या सेवा से हटाना शामिल हो सकता है, की जा सकती है। यह मामला राजस्थान में सार्वजनिक अधिकारियों की वित्तीय लेन‑देनों पर बढ़ती निगरानी को उजागर करता है।
साथ ही, अनंता रिसॉर्ट में बीस विला खरीदने के मामले की भी जांच की जाएगी, जिनका पंजीकरण अधिकारी के परिजनों के नाम पर हुआ है। यह कहा जा रहा है कि इन संपत्तियों की खरीदारी में उपयोग किए गए धन में उनके आधिकारिक आय का मिश्रण हो सकता है।
यह कदम विपक्षी दलों और नागरिक समूहों द्वारा दर्ज की गई शिकायतों के बाद उठाया गया है, जो इस बात का इशारा करते हैं कि ये लेन‑देन सेवा नियमों के विरुद्ध हो सकते हैं और भ्रष्टाचार के संकेत देते हैं। जांच को राज्य कैबिनेट द्वारा नियुक्त एक वरिष्ठ अधिकारी संभालेंगे और रिपोर्ट मुख्य मंत्री को प्रस्तुत की जाएगी।
यदि जांच में दुरुपयोग के प्रमाण मिलते हैं, तो भारतीय प्रशासनिक सेवा (आचरण) नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई, जिसमें निलंबन या सेवा से हटाना शामिल हो सकता है, की जा सकती है। यह मामला राजस्थान में सार्वजनिक अधिकारियों की वित्तीय लेन‑देनों पर बढ़ती निगरानी को उजागर करता है।