📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Mukesh.kfc
मनोरंजन
राजस्थान के बीजेपी नेता ने मिर्ज़ापुर की 'शूरवीर' गाना हटाने की मांग की
✍️ hindustantimes.com
🗓 10 सित. 2026, 09:18 PM
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राजस्थान के एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने मिर्ज़ापुर वेब सीरीज़ से 'शूरवीर' गाना हटाने की औपचारिक मांग की, सांस्कृतिक कारणों को बताया।
राजस्थान के एक प्रमुख बीजेपी नेता ने लोकप्रिय वेब सीरीज़ मिर्ज़ापुर के निर्माताओं को 'शूरवीर' गाना हटाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस गीत के बोल और दृश्य प्रस्तुति राज्य की सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस पहुँचा सकती है।
नेता ने एक औपचारिक पत्र के माध्यम से सीरीज़ की प्रोडक्शन कंपनी को अगले एपिसोड के प्रसारण से पहले इस गाने को संपादित या बदलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मनोरंजन सामग्री को क्षेत्रीय मूल्यों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और ऐसी कोई प्रस्तुति नहीं होनी चाहिए जो जनता को आपत्ति का कारण बने।
मिर्ज़ापुर टीम ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की राजनीतिक हस्तक्षेप भारतीय डिजिटल मीडिया में सामग्री निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं। यह विवाद रचनात्मक स्वतंत्रता और राजनीतिक अपेक्षाओं के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है।
यदि निर्माता इस मांग को मानते हैं तो एपिसोड को पुनः संपादित करके स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म पर फिर से जारी किया जाएगा; अन्यथा यह मुद्दा अन्य राजनीतिक समूहों की जांच का कारण बन सकता है और भारत में सेंसरशिप व कलात्मक अभिव्यक्ति पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।
नेता ने एक औपचारिक पत्र के माध्यम से सीरीज़ की प्रोडक्शन कंपनी को अगले एपिसोड के प्रसारण से पहले इस गाने को संपादित या बदलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मनोरंजन सामग्री को क्षेत्रीय मूल्यों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और ऐसी कोई प्रस्तुति नहीं होनी चाहिए जो जनता को आपत्ति का कारण बने।
मिर्ज़ापुर टीम ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की राजनीतिक हस्तक्षेप भारतीय डिजिटल मीडिया में सामग्री निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं। यह विवाद रचनात्मक स्वतंत्रता और राजनीतिक अपेक्षाओं के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है।
यदि निर्माता इस मांग को मानते हैं तो एपिसोड को पुनः संपादित करके स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म पर फिर से जारी किया जाएगा; अन्यथा यह मुद्दा अन्य राजनीतिक समूहों की जांच का कारण बन सकता है और भारत में सेंसरशिप व कलात्मक अभिव्यक्ति पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।