📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Rajya Sabha, Secretariat
राजनीति
राजस्थान के बीजेपी नेता राधे राठौर ने कहा 'यूएस के साथ युद्ध में पाकिस्तान के साथ खड़े रहेंगे', विरोध
✍️ Livemint
🗓 16 अक्टू. 2026, 09:32 PM
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राजस्थान के बीजेपी प्रमुख राधे राठौर ने कहा कि यदि भारत अमेरिका के साथ युद्ध में जाएगा तो वे पाकिस्तान के साथ खड़े रहेंगे, इस बयान पर विपक्षी दलों ने आलोचना की।
राजस्थान के बीजेपी प्रमुख राधे राठौर ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में यह घोषणा की कि "यदि भारत अमेरिका के साथ युद्ध में जाएगा, तो हम पाकिस्तान के साथ खड़े रहेंगे।" यह बयान पार्टी की विदेशी नीति पर दृष्टिकोण को उजागर करता है।
इस टिप्पणी को भारत के अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी पर एक सीधा चुनौती माना गया, खासकर क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव के बीच। राठौर के शब्दों को एक साहसी बयान के रूप में देखा गया कि पार्टी पाकिस्तान का समर्थन करने के लिए तैयार है।
विपक्षी दलों, जिनमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और आम आदमी पार्टी शामिल हैं, ने तुरंत इस टिप्पणी की निंदा की। उन्होंने राठौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करने का आरोप लगाया और ऐसे बयान की उपयुक्तता पर सवाल उठाया। यह विरोध सोशल मीडिया और संसद में तीव्र चर्चा के साथ बढ़ा।
इस घटना ने राज्य नेताओं की विदेश नीति में भूमिका और ऐसे बयानों के संभावित कूटनीतिक परिणामों पर व्यापक बहस को जन्म दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के बयानों से भारत के अमेरिका के साथ संबंधों पर असर पड़ सकता है और क्षेत्र में देश की रणनीतिक गणनाओं को जटिल बना सकता है।
इस टिप्पणी को भारत के अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी पर एक सीधा चुनौती माना गया, खासकर क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव के बीच। राठौर के शब्दों को एक साहसी बयान के रूप में देखा गया कि पार्टी पाकिस्तान का समर्थन करने के लिए तैयार है।
विपक्षी दलों, जिनमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और आम आदमी पार्टी शामिल हैं, ने तुरंत इस टिप्पणी की निंदा की। उन्होंने राठौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा को कमजोर करने का आरोप लगाया और ऐसे बयान की उपयुक्तता पर सवाल उठाया। यह विरोध सोशल मीडिया और संसद में तीव्र चर्चा के साथ बढ़ा।
इस घटना ने राज्य नेताओं की विदेश नीति में भूमिका और ऐसे बयानों के संभावित कूटनीतिक परिणामों पर व्यापक बहस को जन्म दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के बयानों से भारत के अमेरिका के साथ संबंधों पर असर पड़ सकता है और क्षेत्र में देश की रणनीतिक गणनाओं को जटिल बना सकता है।