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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कम बारिश होने पर जताई चिंता
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सावन बीतने के साथ ही राजस्थान में मानसून कमजोर पड़ गया है और भादों में भी बारिश की उम्मीद क्षीण नजर आ रही है। राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के 17 जिलों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं।
पाली, जालोर, बांसवाड़ा, जैसलमेर और उदयपुर जैसे जिलों में सामान्य से 40 से 55 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है, जो बेहद चिंताजनक है।
हमारी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इंदिरा रसोई और मनरेगा जैसी योजनाएं संकट के समय गरीब, किसान और मजदूर वर्ग का सबसे बड़ा सहारा बनी थीं। सूखे जैसी स्थिति में सबसे अधिक नुकसान किसानों और श्रमिकों को उठाना पड़ता है, इसलिए राज्य सरकार को अभी से सतर्क होकर खाद्यान्न भंडारण बढ़ाने, पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और रोजगार के लिए मनरेगा व शहरी रोजगार गारंटी योजना को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। पशु चारे की उपलब्धता पर भी अभी से ध्यान देना जरूरी है।
मुख्यमंत्री को संबंधित विभागों की समीक्षा कर समय रहते तैयारी की जाए, ताकि आने वाले दिनों में आमजन को संकट का सामना न करना पड़े।
पाली, जालोर, बांसवाड़ा, जैसलमेर और उदयपुर जैसे जिलों में सामान्य से 40 से 55 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है, जो बेहद चिंताजनक है।
हमारी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इंदिरा रसोई और मनरेगा जैसी योजनाएं संकट के समय गरीब, किसान और मजदूर वर्ग का सबसे बड़ा सहारा बनी थीं। सूखे जैसी स्थिति में सबसे अधिक नुकसान किसानों और श्रमिकों को उठाना पड़ता है, इसलिए राज्य सरकार को अभी से सतर्क होकर खाद्यान्न भंडारण बढ़ाने, पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और रोजगार के लिए मनरेगा व शहरी रोजगार गारंटी योजना को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। पशु चारे की उपलब्धता पर भी अभी से ध्यान देना जरूरी है।
मुख्यमंत्री को संबंधित विभागों की समीक्षा कर समय रहते तैयारी की जाए, ताकि आने वाले दिनों में आमजन को संकट का सामना न करना पड़े।