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राजस्थान के बारां में स्थित कोटरागढ़ धाम: माँ अन्नपूर्णा और प्रकतेश्वर महादेव का अलौकिक निवास
जिला बारां के शाहबाद तहसील में स्थित ग्राम राजपुर बेहटा का कोटरागढ़ धाम भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने के लिए विख्यात है। यहाँ माँ अन्नपूर्णा के प्राचीन मंदिर के साथ-साथ स्वयं-भू प्रकतेश्वर महादेव का चमत्कारिक शिवलिंग भी स्थापित है।
राजस्थान के जिला बारां, तहसील शाहबाद के ग्राम राजपुर बेहटा में स्थित माँ कोटरागढ़ धाम भक्तों के बीच अत्यंत श्रद्धा का केंद्र है। यह पावन स्थल माँ अन्नपूर्णा कोटरागढ़ वाली के नाम से जाना जाता है, जहाँ कहा जाता है कि भक्तों की हर मुराद पूरी होती है। इसी धाम में स्वयं-भू प्रकतेश्वर महादेव का एक चमत्कारिक शिवलिंग भी स्थापित है, जिसके आकार में समय के साथ वृद्धि होने की मान्यता है।
मंदिर के पुजारी महाराज संतोष जी वैष्णव के अनुसार, माँ अन्नपूर्णा का यह प्राचीन मंदिर लगभग 10-15 वर्ष पूर्व ग्रामीणों के सहयोग से नव-निर्मित हुआ है, जिसे एक भव्य रूप दिया गया है। इससे पूर्व यहाँ एक बहुत पुराना मंदिर था। यह धाम केवल माँ अन्नपूर्णा के लिए ही नहीं, बल्कि प्रकतेश्वर महादेव के चमत्कारिक शिवलिंग के लिए भी प्रसिद्ध है, जो मिट्टी और झाड़ियों के बीच स्वयं प्रकट हुआ था।
कोटरागढ़ धाम के आसपास कई अन्य महत्वपूर्ण स्थल भी हैं। यहाँ ऐतिहासिक शीतल बावड़ी स्थित है, जिसके बारे में कहा जाता है कि पहले इसी बावड़ी से चार गाँवों की प्यास बुझती थी। इसके अतिरिक्त, धीरपह खोह और गुफाएं भी हैं, जहाँ 12 महीने प्राकृतिक जल का प्रवाह बना रहता है और यह संतों की प्राचीन तपोभूमि मानी जाती है।
मंदिर के पुजारी महाराज संतोष जी वैष्णव के अनुसार, माँ अन्नपूर्णा का यह प्राचीन मंदिर लगभग 10-15 वर्ष पूर्व ग्रामीणों के सहयोग से नव-निर्मित हुआ है, जिसे एक भव्य रूप दिया गया है। इससे पूर्व यहाँ एक बहुत पुराना मंदिर था। यह धाम केवल माँ अन्नपूर्णा के लिए ही नहीं, बल्कि प्रकतेश्वर महादेव के चमत्कारिक शिवलिंग के लिए भी प्रसिद्ध है, जो मिट्टी और झाड़ियों के बीच स्वयं प्रकट हुआ था।
कोटरागढ़ धाम के आसपास कई अन्य महत्वपूर्ण स्थल भी हैं। यहाँ ऐतिहासिक शीतल बावड़ी स्थित है, जिसके बारे में कहा जाता है कि पहले इसी बावड़ी से चार गाँवों की प्यास बुझती थी। इसके अतिरिक्त, धीरपह खोह और गुफाएं भी हैं, जहाँ 12 महीने प्राकृतिक जल का प्रवाह बना रहता है और यह संतों की प्राचीन तपोभूमि मानी जाती है।