📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Himanshu Arya Khowal
राजनीति
राहुल गांधी ने अमेरिका में भारतीय ध्वज के अपमान पर कड़ा प्रहार, खालिस्तानियों को चेतावनी
✍️ Amar Ujala
🗓 31 अग. 2026, 04:49 AM
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राहुल गांधी ने अमेरिका में भारतीय ध्वज के अपमान को निंदा की और इस कदम का समर्थन करने वाले खालिस्तानियों को कड़ी चेतावनी दी।
नई दिल्ली – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के अपमान की खबर पर गुस्सा जाहिर किया। सोशल मीडिया पर जारी बयान में उन्होंने इस कृत्य को "अस्वीकार्य" कहा और इसे करने वालों को कड़ी सजा मिलने की चेतावनी दी।
गांधी ने विशेष रूप से खालिस्तानी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया, यह आरोप लगाते हुए कि वे इस घटना का इस्तेमाल अलगाववादी एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय और अमेरिकी अधिकारियों से इस तरह के कृत्य को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया।
उन्होंने भारतीय सरकार से भी आग्रह किया कि वह अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर ध्वज की सुरक्षा सुनिश्चित करे और दोषियों की पहचान कराए। गांधी ने दोहराते हुए कहा कि भारतीय ध्वज राष्ट्र की संप्रभुता का प्रतीक है और इसे विश्व भर में सम्मानित किया जाना चाहिए।
हालांकि अपमान की सटीक जानकारी अभी जांच के अधीन है, लेकिन गांधी के बयान ने विदेशों में राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और प्रवासी समूहों की भूमिका पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।
यह घटना भारत और विदेशियों के बीच चल रहे कूटनीतिक तनाव में एक नया पहलू जोड़ती है, जहाँ दोनों पक्ष स्थिति को बारीकी से देख रहे हैं।
गांधी ने विशेष रूप से खालिस्तानी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया, यह आरोप लगाते हुए कि वे इस घटना का इस्तेमाल अलगाववादी एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय प्रवासी समुदाय और अमेरिकी अधिकारियों से इस तरह के कृत्य को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया।
उन्होंने भारतीय सरकार से भी आग्रह किया कि वह अमेरिकी अधिकारियों के साथ मिलकर ध्वज की सुरक्षा सुनिश्चित करे और दोषियों की पहचान कराए। गांधी ने दोहराते हुए कहा कि भारतीय ध्वज राष्ट्र की संप्रभुता का प्रतीक है और इसे विश्व भर में सम्मानित किया जाना चाहिए।
हालांकि अपमान की सटीक जानकारी अभी जांच के अधीन है, लेकिन गांधी के बयान ने विदेशों में राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और प्रवासी समूहों की भूमिका पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।
यह घटना भारत और विदेशियों के बीच चल रहे कूटनीतिक तनाव में एक नया पहलू जोड़ती है, जहाँ दोनों पक्ष स्थिति को बारीकी से देख रहे हैं।