📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Themastaadmi
स्वास्थ्य
राहुल गांधी ने बालाघाट में 30 आदिवासी बच्चों की मौत पर सरकार को पूर्ण विफलता कहा, त्वरित कार्रवाई की मांग
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 05 सित. 2026, 07:28 PM
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बालाघाट के बैहर‑बिरसा में 30 आदिवासी बच्चों की मौत पर राहुल गांधी ने सरकार को विफलता कहा, 798 रोगियों के इलाज और राहत के लिए तत्काल जांच की मांग की।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर‑बिरसा क्षेत्र में एक अज्ञात स्वास्थ्य संकट के कारण 30 आदिवासी बच्चों की मौत हो गई, जिससे स्थानीय समुदाय में गहरा शोक व्याप्त है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि उसी क्षेत्र में लगभग 798 रोगी वर्तमान में समान लक्षणों से पीड़ित हैं, जो इस आपदा की गंभीरता को दर्शाता है।
सीनियर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस स्थिति को "सरकार की पूर्ण विफलता" कहकर निंदा की और तुरंत, स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से आपातकालीन चिकित्सा टीमों को तैनात करने, रोगियों का उपचार सुनिश्चित करने और प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने का आग्रह किया।
लगभग 798 रोगियों की संख्या ने निकटवर्ती स्वास्थ्य सुविधाओं की क्षमता को काफ़ी हद तक दबा दिया है, जहाँ संसाधनों की कमी है। गांधी ने कहा कि तेज़ कार्रवाई न केवल अतिरिक्त जानों के नुकसान को रोकने के लिए आवश्यक है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में भरोसा बहाल करने के लिए भी जरूरी है।
अब तक राज्य सरकार ने इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि अधिकारी स्थिति का आकलन कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि देर से हस्तक्षेप से संकट और बढ़ सकता है, विशेषकर दूरस्थ tribal क्षेत्रों में जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है।
यह घटना मध्य भारत के tribal क्षेत्रों में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की अपर्याप्तता पर फिर से सवाल उठाती है, और राजनीतिक नेताओं व नागरिक समाज के समूह दीर्घकालिक समाधान की मांग कर रहे हैं।
सीनियर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस स्थिति को "सरकार की पूर्ण विफलता" कहकर निंदा की और तुरंत, स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से आपातकालीन चिकित्सा टीमों को तैनात करने, रोगियों का उपचार सुनिश्चित करने और प्रभावित परिवारों को राहत प्रदान करने का आग्रह किया।
लगभग 798 रोगियों की संख्या ने निकटवर्ती स्वास्थ्य सुविधाओं की क्षमता को काफ़ी हद तक दबा दिया है, जहाँ संसाधनों की कमी है। गांधी ने कहा कि तेज़ कार्रवाई न केवल अतिरिक्त जानों के नुकसान को रोकने के लिए आवश्यक है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में भरोसा बहाल करने के लिए भी जरूरी है।
अब तक राज्य सरकार ने इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि अधिकारी स्थिति का आकलन कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि देर से हस्तक्षेप से संकट और बढ़ सकता है, विशेषकर दूरस्थ tribal क्षेत्रों में जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है।
यह घटना मध्य भारत के tribal क्षेत्रों में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की अपर्याप्तता पर फिर से सवाल उठाती है, और राजनीतिक नेताओं व नागरिक समाज के समूह दीर्घकालिक समाधान की मांग कर रहे हैं।