📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Øyvind Sagåsen
स्थानीय
रॉकेट ग़ज़ा: मणिपुर में कुकी, मेइतेई और नागा आवाज़ों का मिलन
✍️ The Times of India
🗓 07 नव. 2026, 01:38 AM
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मणिपुर के संघर्ष‑ग्रस्त क्षेत्र में, समुदाय रेडियो स्टेशन रॉकेट ग़ज़ा ने कुकी, मेइतेई और नागा वक्ताओं को एक माइक्रोफोन पर एकजुट कर शांति और संवाद को बढ़ावा दिया।
नॉर्थईस्टर्न राज्य मणिपुर लंबे समय से कुकी, मेइतेई और नागा समुदायों के बीच जातीय तनाव का केंद्र रहा है। इन मतभेदों को कम करने के उद्देश्य से, एक स्थानीय सामुदायिक रेडियो स्टेशन, रॉकेट ग़ज़ा, ने ऐसे कार्यक्रम प्रसारित करना शुरू कर दिया है जिनमें तीनों समूहों के वक्ता एक साथ मिलकर चर्चा करते हैं।
पिछले वर्ष शुरू हुआ रॉकेट ग़ज़ा इम्पाल के एक साधारण स्टूडियो से संचालित होता है और स्वयंसेवकों द्वारा चलाया जाता है जो मानते हैं कि साझा मीडिया समझ बढ़ा सकता है। प्रत्येक कार्यक्रम में एक कुकी, एक मेइतेई और एक नागा होस्ट को आमंत्रित किया जाता है, जो अपनी-अपनी मातृभाषा में स्थानीय मुद्दों, संस्कृति और इतिहास पर चर्चा करते हैं।
सुनने वाले रिपोर्ट करते हैं कि एक ही माइक्रोफोन पर परिचित आवाज़ें सुनने से दृष्टिकोण नरम हुआ है और ऐसी बातचीत शुरू हुई है जो पहले टाली जाती थीं। स्टेशन के निर्माताओं का कहना है कि यह प्रारूप सम्मानजनक बहस को प्रोत्साहित करता है और कृषि, शिक्षा और युवा रोजगार जैसे साझा हितों को उजागर करता है।
हालाँकि यह पहल अभी प्रारंभिक चरण में है, रॉकेट ग़ज़ा की सफलता ने भारत के अन्य संघर्ष‑ग्रस्त क्षेत्रों में समान परियोजनाओं के लिए आह्वान किया है। स्टेशन अपनी पहुँच ऑनलाइन स्ट्रीमिंग और अधिक स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करके बढ़ाने की योजना बना रहा है।
पिछले वर्ष शुरू हुआ रॉकेट ग़ज़ा इम्पाल के एक साधारण स्टूडियो से संचालित होता है और स्वयंसेवकों द्वारा चलाया जाता है जो मानते हैं कि साझा मीडिया समझ बढ़ा सकता है। प्रत्येक कार्यक्रम में एक कुकी, एक मेइतेई और एक नागा होस्ट को आमंत्रित किया जाता है, जो अपनी-अपनी मातृभाषा में स्थानीय मुद्दों, संस्कृति और इतिहास पर चर्चा करते हैं।
सुनने वाले रिपोर्ट करते हैं कि एक ही माइक्रोफोन पर परिचित आवाज़ें सुनने से दृष्टिकोण नरम हुआ है और ऐसी बातचीत शुरू हुई है जो पहले टाली जाती थीं। स्टेशन के निर्माताओं का कहना है कि यह प्रारूप सम्मानजनक बहस को प्रोत्साहित करता है और कृषि, शिक्षा और युवा रोजगार जैसे साझा हितों को उजागर करता है।
हालाँकि यह पहल अभी प्रारंभिक चरण में है, रॉकेट ग़ज़ा की सफलता ने भारत के अन्य संघर्ष‑ग्रस्त क्षेत्रों में समान परियोजनाओं के लिए आह्वान किया है। स्टेशन अपनी पहुँच ऑनलाइन स्ट्रीमिंग और अधिक स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करके बढ़ाने की योजना बना रहा है।