📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Satdeep Gill
अपराध
पंजाब हाई कोर्ट ने जेल में कैदियों की बढ़ती नशे की लत को चेतावनी दी
✍️ Bar and Bench
🗓 09 सित. 2026, 12:18 AM
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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने जेल में कैदियों में बढ़ती नशे की लत को गंभीर समस्या बताया है, जिसमें कई बंदियों का जेल में प्रवेश के बाद नशे की लत लगना शामिल है।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य के जेलों में एक गंभीर समस्या की ओर इशारा किया है। कोर्ट के अनुसार, कई कैदी जेल में दाखिल होते ही नशे की लत में फँस जाते हैं, जिससे जेलों में मादक पदार्थों की उपलब्धता बढ़ रही है।
न्यायालय ने इस स्थिति को "गंभीर" कहा और जेलों के भीतर मादक पदार्थों के प्रसार को रोकने के लिए त्वरित कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह न केवल कैदियों के स्वास्थ्य को खतरे में डालता है, बल्कि दंड प्रणाली के उद्देश्यों को भी कमजोर करता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या अनुचित स्क्रीनिंग, सुरक्षा में ढील और जेलों में ड्रग नेटवर्क के प्रवेश से उत्पन्न हो रही है। उन्होंने ड्रग टेस्टिंग, कड़ी निगरानी और लत मुक्ति कार्यक्रमों को लागू करने की सलाह दी है।
यह चेतावनी पंजाब में व्यापक नशे की समस्या के बीच आती है, जहाँ पहले से ही मादक पदार्थों का प्रकोप है। अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे जेल नीतियों की समीक्षा करें और मादक पदार्थों के प्रवाह को रोकने के लिए पुलिस के साथ समन्वय बढ़ाएँ।
कोर्ट ने राज्य सरकार को एक विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है और कहा है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो आगे की न्यायिक जांच की जा सकती है।
न्यायालय ने इस स्थिति को "गंभीर" कहा और जेलों के भीतर मादक पदार्थों के प्रसार को रोकने के लिए त्वरित कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह न केवल कैदियों के स्वास्थ्य को खतरे में डालता है, बल्कि दंड प्रणाली के उद्देश्यों को भी कमजोर करता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या अनुचित स्क्रीनिंग, सुरक्षा में ढील और जेलों में ड्रग नेटवर्क के प्रवेश से उत्पन्न हो रही है। उन्होंने ड्रग टेस्टिंग, कड़ी निगरानी और लत मुक्ति कार्यक्रमों को लागू करने की सलाह दी है।
यह चेतावनी पंजाब में व्यापक नशे की समस्या के बीच आती है, जहाँ पहले से ही मादक पदार्थों का प्रकोप है। अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे जेल नीतियों की समीक्षा करें और मादक पदार्थों के प्रवाह को रोकने के लिए पुलिस के साथ समन्वय बढ़ाएँ।
कोर्ट ने राज्य सरकार को एक विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है और कहा है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो आगे की न्यायिक जांच की जा सकती है।