📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harvinder Chandigarh
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पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने अनिच्छुक कांस्टेबल को अनिवार्य प्रोमोशन कोर्स से रोका
✍️ Live Law
🗓 18 अक्टू. 2026, 07:16 AM
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पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने कहा कि जो कांस्टेबल पदोन्नति नहीं चाहता, उसे अनिवार्य प्रोमोशन कोर्स में भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। यह फैसला सेवा नियमों की सीमा को स्पष्ट करता है।
पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि जो पुलिस कांस्टेबल पदोन्नति के इच्छुक नहीं है, उसे प्रोमोशनल प्रशिक्षण कोर्स में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने पुलिस सेवा नियमों की जाँच की और कहा कि अनिच्छुक अधिकारियों को अनिवार्य रूप से कोर्स में डालना उनके करियर चयन के अधिकार का उल्लंघन है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रोमोशनल कोर्स केवल उन कर्मचारियों के लिए है जो उन्नति चाहते हैं, और अनिच्छुक कांस्टेबल पर इसे थोपना प्रशासनिक दृष्टिकोण से निरर्थक है। इस प्रकार, सेवा‑नियमों में स्वैच्छिकता का सिद्धांत स्पष्ट हुआ।
इस निर्णय से कांस्टेबलों की स्वायत्तता की रक्षा होगी और समान सेवा‑संबंधी विवादों में precedent स्थापित होगा। यह आदेश पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस नीतियों को पुनः विचार करने की संभावना पैदा करता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अब ऐसे अनिवार्य प्रशिक्षण आदेशों की पुनर्समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य में जारी किए गए निर्देश कोर्ट के इस व्याख्यान के अनुरूप हों।
कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रोमोशनल कोर्स केवल उन कर्मचारियों के लिए है जो उन्नति चाहते हैं, और अनिच्छुक कांस्टेबल पर इसे थोपना प्रशासनिक दृष्टिकोण से निरर्थक है। इस प्रकार, सेवा‑नियमों में स्वैच्छिकता का सिद्धांत स्पष्ट हुआ।
इस निर्णय से कांस्टेबलों की स्वायत्तता की रक्षा होगी और समान सेवा‑संबंधी विवादों में precedent स्थापित होगा। यह आदेश पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस नीतियों को पुनः विचार करने की संभावना पैदा करता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अब ऐसे अनिवार्य प्रशिक्षण आदेशों की पुनर्समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य में जारी किए गए निर्देश कोर्ट के इस व्याख्यान के अनुरूप हों।