📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Harvinder Chandigarh
अपराध
पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने मौत की सजा वाले आरोपी को बरी किया, कहा 'आसान शिकार'
✍️ livelaw.in
🗓 09 सित. 2026, 11:35 AM
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पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने एक मौत की सजा वाले आरोपी को बरी किया, उसे अनाथ और कम साधनों वाला 'आसान शिकार' बताया।
पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट ने एक मौत की सजा वाले आरोपी को बरी किया, मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद उसकी सजा को रद्द कर दिया। अदालत ने आरोपी के अनाथ होने और सीमित साधनों के कारण प्रभावी बचाव न कर पाने को प्रमुख कारण बताया।
कोर्ट ने कहा कि सामाजिक‑आर्थिक असहायता ने आरोपी को 'आसान शिकार' बना दिया, जिससे मूल परीक्षण की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे। यह निर्णय न्यायपालिका की यह जिम्मेदारी रेखांकित करता है कि दोषी की आर्थिक असमर्थता के कारण न्याय में कमी न हो।
यह फैसला राज्य के आपराधिक न्याय में एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाता है, विशेष रूप से मौत की सजा वाले मामलों में जहाँ बचाव की क्षमता कमजोर हो। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्र के समान मामलों की पुनः जाँच हो सकती है।
बरी होने के बावजूद, आरोपी को तुरंत रिहा नहीं किया गया; आधिकारिक प्रक्रियाओं के बाद ही औपचारिक मुक्तिपत्र जारी होगा। अदालत ने निर्देश दिया कि आगे की कोई भी कानूनी कार्रवाई निर्णय में उल्लिखित सिद्धांतों के अनुरूप हो।
यह मामला मानवाधिकार संगठनों का ध्यान आकर्षित कर चुका है, जो इसे वंचित वर्ग के लोगों के निष्पक्ष परीक्षण के अधिकार की पुष्टि मानते हैं।
कोर्ट ने कहा कि सामाजिक‑आर्थिक असहायता ने आरोपी को 'आसान शिकार' बना दिया, जिससे मूल परीक्षण की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठे। यह निर्णय न्यायपालिका की यह जिम्मेदारी रेखांकित करता है कि दोषी की आर्थिक असमर्थता के कारण न्याय में कमी न हो।
यह फैसला राज्य के आपराधिक न्याय में एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाता है, विशेष रूप से मौत की सजा वाले मामलों में जहाँ बचाव की क्षमता कमजोर हो। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्र के समान मामलों की पुनः जाँच हो सकती है।
बरी होने के बावजूद, आरोपी को तुरंत रिहा नहीं किया गया; आधिकारिक प्रक्रियाओं के बाद ही औपचारिक मुक्तिपत्र जारी होगा। अदालत ने निर्देश दिया कि आगे की कोई भी कानूनी कार्रवाई निर्णय में उल्लिखित सिद्धांतों के अनुरूप हो।
यह मामला मानवाधिकार संगठनों का ध्यान आकर्षित कर चुका है, जो इसे वंचित वर्ग के लोगों के निष्पक्ष परीक्षण के अधिकार की पुष्टि मानते हैं।