📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Asmit4
राजनीति
पंजाब सरकार ने नई हाई कोर्ट मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति पर सहमति न मिलने की शिकायत
✍️ The Times of India
🗓 07 सित. 2026, 08:38 AM
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पंजाब राज्य सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति पर औपचारिक आपत्ति जताई है, कहती है कि यह बिना उसकी पूर्व सहमति के की गई।
पंजाब सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की घोषणा के बाद केंद्र सरकार के विरुद्ध औपचारिक विरोध दर्ज किया है। राज्य ने कहा कि इस निर्णय में उसकी पूर्व सहमति नहीं ली गई, जिससे संघ‑राज्य परामर्श की परम्परा का उल्लंघन हुआ।
पंजाब के विधि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाई कोर्ट के नेतृत्व का राज्य में न्याय व्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है, इसलिए वरिष्ठ न्यायिक पद की नियुक्ति से पहले राज्य की राय ली जानी चाहिए। यह आपत्ति नियुक्ति की योग्यता को नहीं, बल्कि प्रक्रिया संबंधी चिंताओं को उजागर करती है।
केंद्र सरकार ने अभी तक इस शिकायत पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस मुद्दे पर आगामी अंतर‑सरकारी बैठकों में चर्चा होने की संभावना है, जहाँ दोनों पक्ष संविधानिक मानदंडों और संघ‑राज्य सहयोग की भावना का सम्मान करने वाले समाधान की तलाश करेंगे।
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि जबकि हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति के अधिकार में है, परम्परागत रूप से राज्य सरकारों से परामर्श किया जाता है। वर्तमान विवाद भविष्य में भारत भर में समान नियुक्तियों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।
पंजाब के विधि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाई कोर्ट के नेतृत्व का राज्य में न्याय व्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है, इसलिए वरिष्ठ न्यायिक पद की नियुक्ति से पहले राज्य की राय ली जानी चाहिए। यह आपत्ति नियुक्ति की योग्यता को नहीं, बल्कि प्रक्रिया संबंधी चिंताओं को उजागर करती है।
केंद्र सरकार ने अभी तक इस शिकायत पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस मुद्दे पर आगामी अंतर‑सरकारी बैठकों में चर्चा होने की संभावना है, जहाँ दोनों पक्ष संविधानिक मानदंडों और संघ‑राज्य सहयोग की भावना का सम्मान करने वाले समाधान की तलाश करेंगे।
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि जबकि हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति के अधिकार में है, परम्परागत रूप से राज्य सरकारों से परामर्श किया जाता है। वर्तमान विवाद भविष्य में भारत भर में समान नियुक्तियों के लिए एक मिसाल स्थापित कर सकता है।