📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / The Madras Year Book 1924, L.D.Swamikannu
नौकरी
प्रमोशन सेवा अवधि का हिसाब फ़ी़डर कैडर के कैलेंडर वर्ष से, वास्तविक तिथि से नहीं
✍️ Live Law
🗓 08 सित. 2026, 03:33 PM
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क़ानूनी विशेषज्ञों ने बताया कि प्रोमोशन के लिए योग्य सेवा अवधि कर्मचारी के फ़ी़डर कैडर में शामिल हुए कैलेंडर वर्ष से गिनी जाएगी, न कि वास्तविक तिथि से।
Live Law ने सरकारी कर्मचारियों के प्रोमोशन के लिए योग्य सेवा अवधि की गणना के बारे में एक स्पष्टीकरण प्रकाशित किया। इस नियम के अनुसार, सेवा अवधि उस कैलेंडर वर्ष से शुरू होगी जिसमें कर्मचारी ने फ़ी़डर कैडर में प्रवेश किया, चाहे वह वर्ष के किसी भी दिन हो।
यह व्याख्या मौजूदा सेवा नियमों के साथ मेल खाती है, जिसका उद्देश्य विभिन्न विभागों में प्रोमोशन की समयसीमा को मानकीकृत करना है। कैलेंडर वर्ष को आधार बनाकर, मध्य वर्ष में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों के बीच उत्पन्न होने वाले अंतर को समाप्त किया जा सकता है।
इस निर्णय का प्रभाव हजारों सिविल सेवकों पर पड़ेगा, जो प्रोमोशन की प्रतीक्षा में हैं, और कई कर्मचारियों के लिए जो वर्ष के अंत में शामिल हुए थे, उनकी पात्रता तिथि को आगे बढ़ा सकता है। अधिकारियों को आगामी प्रोमोशन बोर्डों में इस नियम को समान रूप से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
यह स्पष्टीकरण कई याचिकाओं के बाद आया, जिसमें पहले की प्रथा—वास्तविक joining date से गिनती—पर सवाल उठाए गए थे। कानूनी समुदाय ने इस कदम को प्रोमोशन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के रूप में सराहा है।
यह व्याख्या मौजूदा सेवा नियमों के साथ मेल खाती है, जिसका उद्देश्य विभिन्न विभागों में प्रोमोशन की समयसीमा को मानकीकृत करना है। कैलेंडर वर्ष को आधार बनाकर, मध्य वर्ष में प्रवेश करने वाले कर्मचारियों के बीच उत्पन्न होने वाले अंतर को समाप्त किया जा सकता है।
इस निर्णय का प्रभाव हजारों सिविल सेवकों पर पड़ेगा, जो प्रोमोशन की प्रतीक्षा में हैं, और कई कर्मचारियों के लिए जो वर्ष के अंत में शामिल हुए थे, उनकी पात्रता तिथि को आगे बढ़ा सकता है। अधिकारियों को आगामी प्रोमोशन बोर्डों में इस नियम को समान रूप से लागू करने का निर्देश दिया गया है।
यह स्पष्टीकरण कई याचिकाओं के बाद आया, जिसमें पहले की प्रथा—वास्तविक joining date से गिनती—पर सवाल उठाए गए थे। कानूनी समुदाय ने इस कदम को प्रोमोशन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के रूप में सराहा है।