📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Hiroshi Yoshida
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अजमेर जेल में बंदी ने बनायी 9 फीट की सरदार पटेल की प्रतिकृति, राष्ट्रीय एकता दिवस पर
✍️ Amar Ujala · Rajasthan
🗓 31 अक्टू. 2026, 05:02 PM
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अजमेर के उच्च सुरक्षा जेल में बंदी आरिफ ने राष्ट्रीय एकता दिवस पर सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती में नौ फीट ऊँची प्रतिकृति बनायी।
अजमेर के उच्च सुरक्षा जेल ने 1 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती को विशेष रूप से मनाया। जेल के एक बंदी आरिफ ने कई हफ्तों की मेहनत के बाद पत्थर से नौ फीट ऊँची सरदार पटेल की प्रतिकृति तैयार की और इसे अन्य बंदियों व स्टाफ़ के सामने प्रदर्शित किया।
प्रतिमा के साथ एकता की शपथ समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें सभी बंदों ने राष्ट्रीय एकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस पहल को जेल प्रबंधन ने कैदियों में सकारात्मक ऊर्जा और अनुशासन स्थापित करने के साधन के रूप में बताया।
समारोह में नशामुक्ति का संकल्प भी शामिल था; प्रतिभागियों ने मादक पदार्थों से दूर रहने की प्रतिज्ञा ली। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की सामाजिक‑शिक्षात्मक गतिविधियाँ कैदियों को सामाजिक जिम्मेदारी और देशभक्ति की भावना से जोड़ेंगी।
सरदार पटेल की प्रतिमा, जिन्हें भारत के एकीकरण के वास्तुकार कहा जाता है, को जेल के कार्यशाला में सीमित साधनों से बनाया गया था, फिर भी इसकी शिल्प कौशल की प्रशंसा की गई। प्रबंधन ने कहा कि यह प्रतिमा जेल के भीतर दीर्घकालिक प्रदर्शनी के रूप में रखी जाएगी, जिससे एकता और सुधार का संदेश लगातार बना रहे।
समापन में जेल अधीक्षक ने बंदियों को पटेल के आदर्शों को अपने भविष्य में उतारने, सामाजिक सेवा में योगदान देने और जेल से बाहर एक सकारात्मक नागरिक बनने की प्रेरणा दी।
प्रतिमा के साथ एकता की शपथ समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें सभी बंदों ने राष्ट्रीय एकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस पहल को जेल प्रबंधन ने कैदियों में सकारात्मक ऊर्जा और अनुशासन स्थापित करने के साधन के रूप में बताया।
समारोह में नशामुक्ति का संकल्प भी शामिल था; प्रतिभागियों ने मादक पदार्थों से दूर रहने की प्रतिज्ञा ली। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की सामाजिक‑शिक्षात्मक गतिविधियाँ कैदियों को सामाजिक जिम्मेदारी और देशभक्ति की भावना से जोड़ेंगी।
सरदार पटेल की प्रतिमा, जिन्हें भारत के एकीकरण के वास्तुकार कहा जाता है, को जेल के कार्यशाला में सीमित साधनों से बनाया गया था, फिर भी इसकी शिल्प कौशल की प्रशंसा की गई। प्रबंधन ने कहा कि यह प्रतिमा जेल के भीतर दीर्घकालिक प्रदर्शनी के रूप में रखी जाएगी, जिससे एकता और सुधार का संदेश लगातार बना रहे।
समापन में जेल अधीक्षक ने बंदियों को पटेल के आदर्शों को अपने भविष्य में उतारने, सामाजिक सेवा में योगदान देने और जेल से बाहर एक सकारात्मक नागरिक बनने की प्रेरणा दी।