📷 चित्र स्रोत: TOI India (via NewsData)
विज्ञान
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर पीएम मोदी ने चंद्रयान-3 की सफलता की सराहना की
✍️ TOI India
🗓 23 अग. 2026, 11:39 AM
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राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की प्रशंसा की और चंद्रयान-3 मिशन को एक मील का पत्थर बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर देश को अंतरिक्ष अन्वेषण में निरंतर प्रगति पर बल दिया। उन्होंने चंद्रयान-3 मिशन की सफलता, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग कर गया, को भारत की वैज्ञानिक क्षमता और स्वदेशी तकनीक का प्रमाण बताया।
मोदी ने इस बात को दोहराया कि आर्यभट्ट (1980) से लेकर मंगलयान तक के सभी उपलब्धियों ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मजबूत स्थान दिलाया है। उन्होंने अनुसंधान में निवेश, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और युवा प्रतिभा को पोषित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अंतरिक्ष विज्ञान को राष्ट्रीय गर्व और प्रेरणा का स्रोत मानें, क्योंकि चंद्रयान-3 की उपलब्धि आगे के मिशनों और विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी नवाचार को तेज करेगी।
समापन में, मोदी ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों को शामिल करने वाले अंतरिक्ष‑प्रौद्योगिकी शैक्षिक कार्यक्रमों का विस्तार करने की योजना की घोषणा की, जिससे देशभर में युवा वर्ग को आगामी परियोजनाओं में भाग लेने का अवसर मिले।
यह संबोधन नई दिल्ली से दिया गया और टेलीविजन व डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर प्रसारित हुआ, जिससे वैज्ञानिक समुदाय और जनता दोनों की प्रशंसा मिली।
मोदी ने इस बात को दोहराया कि आर्यभट्ट (1980) से लेकर मंगलयान तक के सभी उपलब्धियों ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मजबूत स्थान दिलाया है। उन्होंने अनुसंधान में निवेश, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और युवा प्रतिभा को पोषित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अंतरिक्ष विज्ञान को राष्ट्रीय गर्व और प्रेरणा का स्रोत मानें, क्योंकि चंद्रयान-3 की उपलब्धि आगे के मिशनों और विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी नवाचार को तेज करेगी।
समापन में, मोदी ने स्कूलों और विश्वविद्यालयों को शामिल करने वाले अंतरिक्ष‑प्रौद्योगिकी शैक्षिक कार्यक्रमों का विस्तार करने की योजना की घोषणा की, जिससे देशभर में युवा वर्ग को आगामी परियोजनाओं में भाग लेने का अवसर मिले।
यह संबोधन नई दिल्ली से दिया गया और टेलीविजन व डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर प्रसारित हुआ, जिससे वैज्ञानिक समुदाय और जनता दोनों की प्रशंसा मिली।