📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / India Post, Government of India
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पटना हाईकोर्ट ने किशोरावस्था के अपराध के आधार पर बीएसएपी सिपाही की भर्ती पर लगाए प्रतिबंध को हटाया
✍️ Amar Ujala · Patna
🗓 13 अक्टू. 2026, 08:36 PM
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पटना हाईकोर्ट ने किशोरावस्था में दर्ज आपराधिक मामले के कारण बीएसएपी सिपाही की भर्ती रद्द करने के अपने आदेश को निरस्त किया और चार महीने में पुनः विचार करने का निर्देश दिया।
पटना हाईकोर्ट ने मंगलवार को अपने पूर्व आदेश को उलट दिया, जिसमें किशोरावस्था में दर्ज आपराधिक मामले के आधार पर बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (बीएसएपी) के एक सिपाही की भर्ती रद्द कर दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसी रद्दीकरण के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था और विभाग को मामले का पुनः मूल्यांकन करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को चार महीने के भीतर आवेदक की पृष्ठभूमि और किशोरावस्था के अपराध की पात्रता मानदंडों से सम्बंधिता की नई जांच करने का आदेश दिया। आवेदक या उस समय के अपराध के विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि नाबालिगावस्था में किए गए अपराधों को स्वचालित रूप से अयोग्य नहीं माना जाना चाहिए, जब तक कि वे गंभीर अपराध न हों। यह रुख अन्य राज्य पुलिस भर्ती मामलों में भी समान प्रभाव डाल सकता है।
बीएसएपी भर्ती बोर्ड को कोर्ट द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी संशोधित रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है, जिसके बाद अंतिम नियुक्ति निर्णय लिया जाएगा।
कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को चार महीने के भीतर आवेदक की पृष्ठभूमि और किशोरावस्था के अपराध की पात्रता मानदंडों से सम्बंधिता की नई जांच करने का आदेश दिया। आवेदक या उस समय के अपराध के विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि नाबालिगावस्था में किए गए अपराधों को स्वचालित रूप से अयोग्य नहीं माना जाना चाहिए, जब तक कि वे गंभीर अपराध न हों। यह रुख अन्य राज्य पुलिस भर्ती मामलों में भी समान प्रभाव डाल सकता है।
बीएसएपी भर्ती बोर्ड को कोर्ट द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी संशोधित रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है, जिसके बाद अंतिम नियुक्ति निर्णय लिया जाएगा।