📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / India Post, Government of India
अपराध
पटना HC ने 1996 करपी हत्याकांड में 13 अभियुक्तों को बरी किया
✍️ The Times of India
🗓 14 अक्टू. 2026, 08:38 AM
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पटना उच्च न्यायालय ने 1996 के करपी हत्याकांड में जेल में आजीवन कारावास की सज़ा काट रहे 13 अभियुक्तों को बरी कर दिया है। न्यायालय ने इस फैसले में जांच में हुए गंभीर लापरवाही का हवाला दिया है।
पटना उच्च न्यायालय ने एक लंबे समय से लंबित आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें 13 व्यक्तियों को बरी कर दिया गया है जिन्हें आजीवन कारावास की सज़ा काटनी थी। यह मामला 1996 में करपी में हुए एक हत्याकांड से जुड़ा हुआ है। न्यायालय का यह फैसला इस दशकों पुराने विवाद में एक बड़ी कानूनी घटनाक्रम के रूप में माना जा रहा है।
बेंच ने जांच में हुए विशिष्ट लापरवाही को बरी करने का मुख्य कारण बताया। न्यायाधीशों ने पाया कि प्रक्रियात्मक त्रुटियों और जांच की कमियों ने अभियुक्तों के खिलाफ मामले की अखंडता को नुकसान पहुंचाया। यह आदेश आपराधिक न्याय में सख्त और कानूनी रूप से सही जांच प्रक्रियाओं के महत्व को रेखांकित करता है।
बरी किए गए 13 व्यक्तियों ने पिछली सज़ा के आधार पर जेल में काफी लंबा समय बिताया था। उच्च न्यायालय के आदेश के साथ ही 1996 के घटनाक्रम से जुड़े आरोपों से उनकी छुट्टी हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रक्रियात्मक लापरवाही के आधार पर ऐसे बरी किए जाने कम देखे जाते हैं, लेकिन ये जांच प्रक्रियाओं पर एक महत्वपूर्ण नियंत्रण के रूप में कार्य करते हैं।
बेंच ने जांच में हुए विशिष्ट लापरवाही को बरी करने का मुख्य कारण बताया। न्यायाधीशों ने पाया कि प्रक्रियात्मक त्रुटियों और जांच की कमियों ने अभियुक्तों के खिलाफ मामले की अखंडता को नुकसान पहुंचाया। यह आदेश आपराधिक न्याय में सख्त और कानूनी रूप से सही जांच प्रक्रियाओं के महत्व को रेखांकित करता है।
बरी किए गए 13 व्यक्तियों ने पिछली सज़ा के आधार पर जेल में काफी लंबा समय बिताया था। उच्च न्यायालय के आदेश के साथ ही 1996 के घटनाक्रम से जुड़े आरोपों से उनकी छुट्टी हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि प्रक्रियात्मक लापरवाही के आधार पर ऐसे बरी किए जाने कम देखे जाते हैं, लेकिन ये जांच प्रक्रियाओं पर एक महत्वपूर्ण नियंत्रण के रूप में कार्य करते हैं।