Crime
पटना में खुले सेफ्टी टैंक में गिरकर 4 वर्षीय पीयूष की मौत, 12 घंटे बाद भी नहीं ढका गया टैंक
मकान मालिक की पहचान करने में पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल, घटनास्थल पर पड़ा है बच्चे का चप्पल
पटना। मेहंदीगंज थाना क्षेत्र की शिव कॉलोनी में खुले सेफ्टी टैंक में गिरने से चार वर्षीय पीयूष कुमार की दर्दनाक मौत हो गई। बुधवार शाम हुए इस हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा है। वहीं, घटना के 12 घंटे से अधिक समय बीतने के बावजूद सेफ्टी टैंक खुला पड़ा है और घटनास्थल पर बच्चे का चप्पल भी मौजूद है। इससे सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, पीयूष अपने परिवार के साथ शिव कॉलोनी में किराए के मकान में रहता था। पास में ही एक नवनिर्मित मकान में शौचालय के लिए करीब चार फीट गहरा सेफ्टी टैंक बनाया गया था, जो खुला हुआ था। बुधवार शाम करीब पांच बजे खेलते समय पीयूष अचानक लापता हो गया। परिजनों ने काफी देर तक उसकी तलाश की। इसी दौरान टैंक में बच्चे की चप्पल तैरती दिखाई दी।
बीएमपी जवान ने टैंक में कूदकर निकाला बच्चा
बच्चे को टैंक में देखकर पड़ोस में रहने वाले बीएमपी कांस्टेबल मनोज ने साहस दिखाते हुए टैंक में छलांग लगाई और पीयूष को बाहर निकाला। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हादसे के बाद भी नहीं ढका गया टैंक
घटना के बाद भी मौके पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। 12 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी सेफ्टी टैंक खुला पड़ा है और बच्चे का चप्पल घटनास्थल पर ही मौजूद है। स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब तक मकान मालिक की पहचान नहीं हो पाने की बात सामने आई है।
मेहंदीगंज थानाध्यक्ष पूजा कुमारी ने बताया कि परिजनों की ओर से आवेदन मिलने के बाद मकान मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इस दर्दनाक हादसे ने निर्माणाधीन मकानों में सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि यदि खुले टैंक को समय रहते ढक दिया गया होता, तो क्या मासूम पीयूष की जान बच सकती थी? अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में कब तक कार्रवाई करती है और खुले टैंक को सुरक्षित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
जानकारी के अनुसार, पीयूष अपने परिवार के साथ शिव कॉलोनी में किराए के मकान में रहता था। पास में ही एक नवनिर्मित मकान में शौचालय के लिए करीब चार फीट गहरा सेफ्टी टैंक बनाया गया था, जो खुला हुआ था। बुधवार शाम करीब पांच बजे खेलते समय पीयूष अचानक लापता हो गया। परिजनों ने काफी देर तक उसकी तलाश की। इसी दौरान टैंक में बच्चे की चप्पल तैरती दिखाई दी।
बीएमपी जवान ने टैंक में कूदकर निकाला बच्चा
बच्चे को टैंक में देखकर पड़ोस में रहने वाले बीएमपी कांस्टेबल मनोज ने साहस दिखाते हुए टैंक में छलांग लगाई और पीयूष को बाहर निकाला। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हादसे के बाद भी नहीं ढका गया टैंक
घटना के बाद भी मौके पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। 12 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी सेफ्टी टैंक खुला पड़ा है और बच्चे का चप्पल घटनास्थल पर ही मौजूद है। स्थानीय स्तर पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब तक मकान मालिक की पहचान नहीं हो पाने की बात सामने आई है।
मेहंदीगंज थानाध्यक्ष पूजा कुमारी ने बताया कि परिजनों की ओर से आवेदन मिलने के बाद मकान मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इस दर्दनाक हादसे ने निर्माणाधीन मकानों में सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि यदि खुले टैंक को समय रहते ढक दिया गया होता, तो क्या मासूम पीयूष की जान बच सकती थी? अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में कब तक कार्रवाई करती है और खुले टैंक को सुरक्षित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।