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पटना एम्स में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
Health

पटना एम्स में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

✍️ Reporter: Awanish Kumar 🗓 14 Aug 2026, 08:06 AM 👁 74
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पटना एम्स में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन जिसका उद्घाटन एम्स के कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर डॉ राजु अग्रवाल ने किया

पटना से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट

राष्ट्रीय जॉइंट रिप्लेसमेंट दिवस पर एम्स पटना में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन


दर्द को सहना मजबूरी नहीं, सही इलाज से फिर से चलना संभव है।” इसी संदेश के साथ राष्ट्रीय जॉइंट रिप्लेसमेंट दिवस के अवसर पर एम्स पटना के ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने 12 अगस्त को विशेष जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में लोगों को घुटने और कूल्हे के दर्द, गठिया, जोड़ों की देखभाल और आधुनिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. डॉ. सुदीप कुमार, यूनिट हेड एवं प्रभारी, जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्विसेज, ऑर्थोपेडिक्स विभाग, एम्स पटना के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर प्रो. डॉ. अनूप कुमार, विभागाध्यक्ष, ऑर्थोपेडिक्स विभाग, एम्स पटना भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि घुटने या कूल्हे का लगातार दर्द, अकड़न और चलने फिरने में परेशानी को केवल उम्र बढ़ने का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जब दर्द के कारण सीढ़ियां चढ़ना, चलना, बैठना उठना या रोजमर्रा के सामान्य काम मुश्किल होने लगें तो विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
लोगों को बताया गया कि हर मरीज को जॉइंट रिप्लेसमेंट की जरूरत नहीं होती। लेकिन जब दवाइयों, व्यायाम, फिजियोथेरेपी और अन्य उपचारों से पर्याप्त राहत न मिले और जोड़ों की समस्या जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करने लगे तब विशेषज्ञ मरीज की स्थिति का मूल्यांकन कर जॉइंट रिप्लेसमेंट की सलाह दे सकते हैं।
कार्यक्रम की सबसे खास बात रही जॉइंट रिप्लेसमेंट करा चुके मरीजों की भागीदारी। मरीजों ने बताया कि सर्जरी से पहले किस तरह दर्द और चलने फिरने की परेशानी ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया था। उन्होंने इलाज, सर्जरी और रिकवरी के अपने अनुभव साझा किए और बताया कि उपचार के बाद उनकी गतिशीलता और जीवन की गुणवत्ता में किस तरह सुधार आया।
इन वास्तविक अनुभवों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को यह समझने में मदद की कि सही मरीज, सही समय और सही उपचार से जॉइंट रिप्लेसमेंट जीवन में फिर से सक्रियता ला सकता है।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि जॉइंट रिप्लेसमेंट केवल ऑपरेशन का नाम नहीं है। यह एक पूरी उपचार यात्रा है जिसमें मरीज का सही चयन, सर्जरी की योजना, ऑपरेशन के बाद की देखभाल, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास और लंबे समय तक जोड़ों की देखभाल महत्वपूर्ण होती है।
कार्यक्रम में लोगों ने जोड़ों के दर्द, गठिया, सर्जरी की जरूरत, ऑपरेशन के बाद रिकवरी, फिजियोथेरेपी और सावधानियों से जुड़े सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने सभी सवालों का जवाब देते हुए लोगों को समय पर चिकित्सा सलाह लेने के लिए प्रेरित किया।
दर्द के साथ समझौता नहीं, समाधान की ओर कदम”
कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को संदेश दिया गया कि जोड़ों का दर्द जीवन की गति को रोकने वाला कारण नहीं बनना चाहिए। समय पर जांच, सही सलाह और उचित उपचार के माध्यम से मरीज फिर से सक्रिय और आत्मनिर्भर जीवन की ओर लौट सकते हैं।
एम्स पटना का ऑर्थोपेडिक्स विभाग ऐसे जन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को आधुनिक उपचार विकल्पों की जानकारी देने और बेहतर ऑर्थोपेडिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए प्रतिबद्ध है।
संदेश साफ है कि दर्द को नजरअंदाज न करें, उसे समझें; समय पर सलाह लें और जरूरत पड़ने पर सही इलाज के साथ फिर से अपने कदमों को रफ्तार दें।
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