🔥 TRENDING Ground Collapse at CCL's Lancaster Hos... Black Paint Defaces Dr Shyama Prasad M... AMD, HPE, MRNA Stocks Hit 52-Week Peak... पाण्याच्या तीव्र टंचाईमुळे शेतकरी हवाल... ASTS Stock Set for Strongest Month Sin... Congress Protest in Bengaluru Over Raj...
28 Sep 2026•
ગુજરાતી मराठी ਪੰਜਾਬੀ বাংলা
पटना एम्स में हुआ पहला जीवित लिवर का प्रत्यारोपण
Health

पटना एम्स में हुआ पहला जीवित लिवर का प्रत्यारोपण

✍️ Reporter: Awanish Kumar 🗓 17 Aug 2026, 06:22 PM 👁 135
Share: 💬 WhatsApp 📘 Facebook 𝕏 Post

पटना एम्स में 7अगस्त को पहले जीवित लिवर कालशल्य चिकित्सा के बाद लगभग 15घंटे तक चले5प्रत्यारोपण के बाद सफल हुआ ऑपरेशन

पटना से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट

एम्स पटना में पहली लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सफल, बिहार में अत्याधुनिक लिवर ट्रांसप्लांट सेवाओं की दिशा में ऐतिहासिक कदम

पटना, 17 अगस्त 2026

जब चिकित्सा विज्ञान की विशेषज्ञता, परिवार का साहस और संस्थान का संकल्प एक साथ आते हैं तो जीवन को एक नई उम्मीद मिलती है। एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के दूरदर्शी नेतृत्व में एम्स पटना ने पहली लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता न केवल एक मरीज को नया जीवन देने की कहानी है बल्कि बिहार में अत्याधुनिक लिवर ट्रांसप्लांट सेवाओं के एक नए अध्याय की शुरुआत भी है।
यह जटिल ट्रांसप्लांट एम्स पटना के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग द्वारा किया गया। इससे पहले संस्थान बिहार का पहला डीसिज्ड डोनर लिवर ट्रांसप्लांट भी सफलतापूर्वक कर चुका है। लिवर ट्रांसप्लांट की इन दोनों महत्वपूर्ण उपलब्धियों के साथ एम्स पटना अब बिहार और आसपास के राज्यों के मरीजों को उन्नत लिवर एवं ट्रांसप्लांट सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इस सफल ट्रांसप्लांट के केंद्र में पटना की 54 वर्षीय एक मरीज है जो ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस से पीड़ित थी। इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली लिवर पर ही हमला करने लगती है जिससे समय के साथ लिवर को गंभीर और स्थायी क्षति पहुंच सकती है।
बीमारी जब अंतिम चरण में पहुंची तो मरीज के लिए लिवर ट्रांसप्लांट ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी विकल्प रह गया। ऐसे कठिन समय में मरीज की पत्नी आगे आईं और उन्होंने अपने स्वस्थ लिवर का एक हिस्सा दान किया।
डोनर और मरीज दोनों की विस्तृत चिकित्सकीय जांच और गहन मूल्यांकन के बाद यह सुनिश्चित किया गया कि ट्रांसप्लांट दोनों के लिए सुरक्षित और उपयुक्त है।
लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट आधुनिक चिकित्सा की सबसे जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं में से एक है। इसमें लगभग एक साथ दो बड़ी सर्जिकल प्रक्रियाएं होती हैं—पहली, स्वस्थ डोनर के लिवर का एक हिस्सा सुरक्षित रूप से निकालना और दूसरी, उसी हिस्से को मरीज में प्रत्यारोपित करना।
इस दौरान लिवर की प्रमुख रक्त वाहिकाओं और पित्त नलिकाओं को अत्यंत सावधानी और विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाता है। इसके बाद डोनर और मरीज दोनों की गहन निगरानी और विशेषज्ञ चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है।
लिवर की सबसे अद्भुत विशेषताओं में से एक उसकी पुनर्जीवित होने की क्षमता है। ट्रांसप्लांट के बाद डोनर के शरीर में बचा हुआ लिवर और मरीज में प्रत्यारोपित लिवर का हिस्सा आने वाले हफ्तों और महीनों में धीरे-धीरे बढ़ता है और अपनी कार्यक्षमता विकसित करता है।
इस उपलब्धि के पीछे एम्स पटना की एक बड़ी और समर्पित बहु-विषयक विशेषज्ञ टीम का सामूहिक प्रयास रहा।
लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रम का नेतृत्व प्रो. उत्पल आनंद, विभागाध्यक्ष, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने किया। उनके साथ डॉ. कुणाल पारस, डॉ.बसंत नारायण सिंह और डॉ. किसलय कांत मुख्य टीम के सदस्य थे।
कार्यक्रम को प्रो. उमेश कुमार भदानी, डॉ. कुणाल सिंह और डॉ. रजनीश कुमार- एनेस्थीसियोलॉजी; प्रो. राजीव नयन प्रियदर्शी- इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी तथा प्रो. रमेश कुमार-गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सहित विभिन्न विशेषज्ञों का सहयोग मिला।
यह ट्रांसप्लांट सेंटर फॉर लिवर एंड बाइलरी साइंसेस की टीम के सहयोग से किया गया जिसका नेतृत्व प्रो. सुभाष गुप्ता ने किया।
ट्रांसप्लांट जैसी जटिल प्रक्रिया किसी एक विभाग या एक सर्जन की सफलता नहीं होती। इसके पीछे ट्रांसप्लांट सर्जन, हेपेटोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन और ब्लड बैंक टीम का एकजुट प्रयास होता है।
एम्स पटना के लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी सुलभ और किफायती उपचार की प्रतिबद्धता है।
शुरुआती पांच पात्र बीपीएल परिवारों के मरीजों को एम्स रिलीफ फंड के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इससे लिवर ट्रांसप्लांट जैसे जटिल और महंगे उपचार का आर्थिक बोझ कम करने में मदद मिलेगी।
एम्स पटना में लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रम की स्थापना और इसकी सफल शुरुआत कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल के दूरदर्शी नेतृत्व, मार्गदर्शन और संस्थागत प्रतिबद्धता का परिणाम है।
कार्यक्रम को नीलोत्पल बल, उप निदेशक (प्रशासन), एम्स पटना तथा प्रो. प्रशांत कुमार सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, एम्स पटना का महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं संस्थागत सहयोग मिला। इनके सहयोग से आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, प्रशासनिक समन्वय और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई।
एम्स पटना में पहली लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट की सफलता सिर्फ एक ऑपरेशन की सफलता नहीं है। यह बिहार के मरीजों के लिए एक नई उम्मीद की शुरुआत है।
अब लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए अत्याधुनिक ट्रांसप्लांट उपचार उनके अपने राज्य में उपलब्ध कराने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार हुआ है। इससे मरीजों और उनके परिवारों को जटिल इलाज के लिए दूसरे राज्यों के बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता को कम करने में मदद मिलेगी।
एम्स पटना का लक्ष्य है कि बिहार और पड़ोसी राज्यों के मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली, अत्याधुनिक, किफायती और मरीज-केंद्रित लिवर ट्रांसप्लांट सेवाएं अपने घर के करीब मिल सकें।
📲Get App