📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / KennyOMG
अपराध
संसदीय समिति ने पahalगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा बढ़ाने का आग्रह किया
✍️ Amar Ujala
🗓 10 अग. 2026, 10:40 AM
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पahalगाम हमले के बाद, एक संसदीय समिति ने जम्मू-कश्मीर के पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए सख्त प्रोटोकॉल की सिफारिश की है।
संसदीय समिति, जिसमें दोनों सदनों के सदस्य शामिल हैं, ने पahalगाम में हुए हालिया हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर व्यापक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इसने राज्य अधिकारियों से अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, निगरानी प्रणालियों की स्थापना और नियमित सुरक्षा अभ्यास करने का आग्रह किया।
सिफारिशों में स्थानीय पुलिस, सीमा सुरक्षा बल और पर्यटन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की मांग भी शामिल है ताकि किसी भी खतरे का त्वरित सामना किया जा सके। समिति ने बताया कि पर्यटकों की सुरक्षा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए अनिवार्य है।
राज्य अधिकारियों ने समिति की चिंताओं को स्वीकार किया है और मौजूदा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने का वादा किया है। वे प्रस्तावित उपायों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बना रहे हैं, जिसकी शुरुआत गुल्मर्ग, सोनमर्ग और शंकराचार्य मंदिर जैसे उच्च-आवागमन वाले स्थानों से होगी।
पahalगाम की घटना, जिसमें जान-माल का नुकसान हुआ और सुरक्षा चिंताएँ बढ़ गईं, ने खुलापन और सतर्कता के बीच संतुलन पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस को जन्म दिया है। समिति की रिपोर्ट आने वाले महीनों में नीति निर्णयों पर प्रभाव डालने की उम्मीद है।
सिफारिशों में स्थानीय पुलिस, सीमा सुरक्षा बल और पर्यटन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की मांग भी शामिल है ताकि किसी भी खतरे का त्वरित सामना किया जा सके। समिति ने बताया कि पर्यटकों की सुरक्षा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए अनिवार्य है।
राज्य अधिकारियों ने समिति की चिंताओं को स्वीकार किया है और मौजूदा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने का वादा किया है। वे प्रस्तावित उपायों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बना रहे हैं, जिसकी शुरुआत गुल्मर्ग, सोनमर्ग और शंकराचार्य मंदिर जैसे उच्च-आवागमन वाले स्थानों से होगी।
पahalगाम की घटना, जिसमें जान-माल का नुकसान हुआ और सुरक्षा चिंताएँ बढ़ गईं, ने खुलापन और सतर्कता के बीच संतुलन पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस को जन्म दिया है। समिति की रिपोर्ट आने वाले महीनों में नीति निर्णयों पर प्रभाव डालने की उम्मीद है।