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प्रयागराज: बाल चिकित्सालय निर्माण में अनियमितता, फर्म ब्लैकलिस्ट और पांच इंजीनियरों पर कार्रवाई
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मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में बाल चिकित्सालय निर्माण में देरी और फर्जीवाड़े के मामले में यूपीसीडको ने आरसीबी इन्फ्राकंस को ब्लैकलिस्ट कर पांच इंजीनियरों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू की है।
प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज परिसर में निर्माणाधीन बाल चिकित्सालय के कार्य में अत्यधिक देरी और गंभीर अनियमितताओं के मामले में उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (यूपीसीडको) ने कड़ा कदम उठाया है। निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वाली फर्म आरसीबी इन्फ्राकंस को पांच साल के लिए काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डाल दिया गया है। साथ ही, इस परियोजना से जुड़े पांच इंजीनियरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि बाल चिकित्सालय का निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा नहीं किया गया, जिसके चलते 9 अप्रैल को फर्म का अनुबंध निरस्त कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, फर्म द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराने और निविदा प्रक्रिया में त्रुटियां अपनाने के मामले भी उजागर हुए हैं। इस लापरवाही के कारण विभाग ने फर्म की 55 लाख रुपये की जमानत राशि जब्त कर ली है और अग्रिम भुगतान की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
इस मामले में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता मनीष कुमार श्रीवास्तव और सहायक अभियंता धर्म शंकर त्रिपाठी सहित संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जांच और कार्रवाई की जा रही है। फर्जी दस्तावेजों और त्रुटिपूर्ण निविदा प्रक्रिया में संलिप्त अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने के लिए मुख्य अभियंता (पूर्व) एके निर्मल को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। अब बाल चिकित्सालय के शेष निर्माण कार्य को गति देने और इसे जल्द से जल्द संपन्न कराने की पूरी जिम्मेदारी उनके पास होगी।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि बाल चिकित्सालय का निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा नहीं किया गया, जिसके चलते 9 अप्रैल को फर्म का अनुबंध निरस्त कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, फर्म द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकरण कराने और निविदा प्रक्रिया में त्रुटियां अपनाने के मामले भी उजागर हुए हैं। इस लापरवाही के कारण विभाग ने फर्म की 55 लाख रुपये की जमानत राशि जब्त कर ली है और अग्रिम भुगतान की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
इस मामले में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता मनीष कुमार श्रीवास्तव और सहायक अभियंता धर्म शंकर त्रिपाठी सहित संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जांच और कार्रवाई की जा रही है। फर्जी दस्तावेजों और त्रुटिपूर्ण निविदा प्रक्रिया में संलिप्त अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने के लिए मुख्य अभियंता (पूर्व) एके निर्मल को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। अब बाल चिकित्सालय के शेष निर्माण कार्य को गति देने और इसे जल्द से जल्द संपन्न कराने की पूरी जिम्मेदारी उनके पास होगी।