Politics
पूर्व मंत्री योगेंद्र साव तीन साल के लिए कांग्रेस से निष्कासित, मुख्यमंत्री पर टिप्पणी बनी वजह
झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तीन वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को कार्रवाई का मुख्य कारण बताया गया है।
रांची/हजारीबाग। झारखंड की राजनीति में पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के निष्कासन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। प्रदेश कांग्रेस ने उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तीन वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने अनुशासन समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की। पार्टी के अनुसार, गठबंधन सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ मीडिया में लगातार कथित आपत्तिजनक एवं व्यक्तिगत टिप्पणियां करना कार्रवाई की प्रमुख वजह बना।
मिली जानकारी के अनुसार, योगेंद्र साव को 20 सितंबर 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद उनके जवाब की समीक्षा की गई और 26 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई हुई। मामले पर विचार करने के बाद अनुशासन समिति ने निष्कासन की अनुशंसा की, जिसके आधार पर प्रदेश कांग्रेस ने यह निर्णय लिया।
योगेंद्र साव को इससे पहले 20 मार्च 2026 को भी अनुशासनहीनता के आरोप में तीन वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया था। हालांकि, खेद व्यक्त करने और भविष्य में ऐसा नहीं करने का आश्वासन देने के बाद 25 जून 2026 को उनका निष्कासन वापस लेकर उन्हें बहाल कर दिया गया था। अब दोबारा कार्रवाई होने से उनका मामला फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है।
हजारीबाग में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और अंचल अधिकारी (सीओ) के साथ बहस से जुड़े घटनाक्रम के बाद योगेंद्र साव के बयान चर्चा में आए थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर उनकी टिप्पणियों को लेकर विवाद बढ़ा। इस बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से भी कांग्रेस से कार्रवाई की मांग किए जाने की खबरें सामने आई थीं। इस कार्रवाई के साथ कांग्रेस ने पार्टी अनुशासन और गठबंधन की मर्यादा को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है।
मिली जानकारी के अनुसार, योगेंद्र साव को 20 सितंबर 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद उनके जवाब की समीक्षा की गई और 26 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई हुई। मामले पर विचार करने के बाद अनुशासन समिति ने निष्कासन की अनुशंसा की, जिसके आधार पर प्रदेश कांग्रेस ने यह निर्णय लिया।
योगेंद्र साव को इससे पहले 20 मार्च 2026 को भी अनुशासनहीनता के आरोप में तीन वर्षों के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया था। हालांकि, खेद व्यक्त करने और भविष्य में ऐसा नहीं करने का आश्वासन देने के बाद 25 जून 2026 को उनका निष्कासन वापस लेकर उन्हें बहाल कर दिया गया था। अब दोबारा कार्रवाई होने से उनका मामला फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है।
हजारीबाग में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और अंचल अधिकारी (सीओ) के साथ बहस से जुड़े घटनाक्रम के बाद योगेंद्र साव के बयान चर्चा में आए थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर उनकी टिप्पणियों को लेकर विवाद बढ़ा। इस बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से भी कांग्रेस से कार्रवाई की मांग किए जाने की खबरें सामने आई थीं। इस कार्रवाई के साथ कांग्रेस ने पार्टी अनुशासन और गठबंधन की मर्यादा को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है।