📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office
बिज़नेस
पारस डेयरी‑केआईएस ग्रुप ने 1,000 करोड़ रुपये निवेश कर 10 बायो‑सीएनजी प्लांट बनाएंगे
✍️ Business Standard
🗓 10 सित. 2026, 05:03 AM
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पारस डेयरी और केआईएस ग्रुप ने मिलकर भारत में 10 बायो‑सीएनजी प्लांट स्थापित करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बताई।
पारस डेयरी और केआईएस ग्रुप ने मिलकर देश भर में दस बायो‑सीएनजी प्लांट स्थापित करने के लिए साझेदारी की है और इस परियोजना में कुल ₹1,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा। दोनों कंपनियों ने एक संयुक्त बयान में बताया कि यह पहल डेयरी उद्योग के कचरे को स्वच्छ ईंधन में बदलने पर केंद्रित होगी।
बायो‑सीएनजी, यानी बायोमिथेन, गाय के गोबर, दूध प्रसंस्करण के अपशिष्ट आदि जैविक कचरे को प्रोसेस करके प्राप्त किया जाता है। इस ईंधन से पारंपरिक एलपीजी और डीजल की जगह ली जा सकती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और ग्रामीण‑शहरी दोनों क्षेत्रों में सतत ऊर्जा उपलब्ध होगी।
साथी कंपनियों ने बताया कि अगले कुछ वर्षों में ये प्लांट स्थापित किए जाएंगे, हालांकि अभी तक सटीक स्थान का खुलासा नहीं किया गया है। प्रत्येक संयंत्र हजारों टन कचरे को संसाधित कर पर्याप्त बायोमिथेन उत्पन्न करेगा, जो हजारों घरों या व्यावसायिक बेड़ों को चलाने के लिए पर्याप्त होगा। यह पहल भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों और कृषि में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की सरकारी नीति के अनुरूप है।
विश्लेषकों का मानना है कि ₹1,000 करोड़ का यह निवेश बायो‑सीएनजी बाजार को महत्वपूर्ण गति देगा, क्योंकि नीति समर्थन और कम‑कार्बन ईंधन की बढ़ती मांग इस क्षेत्र को आकर्षक बना रही है। इस सहयोग से डेयरी किसानों को अपने कचरे को आय के स्रोत में बदलने का नया अवसर भी मिलेगा।
बायो‑सीएनजी, यानी बायोमिथेन, गाय के गोबर, दूध प्रसंस्करण के अपशिष्ट आदि जैविक कचरे को प्रोसेस करके प्राप्त किया जाता है। इस ईंधन से पारंपरिक एलपीजी और डीजल की जगह ली जा सकती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और ग्रामीण‑शहरी दोनों क्षेत्रों में सतत ऊर्जा उपलब्ध होगी।
साथी कंपनियों ने बताया कि अगले कुछ वर्षों में ये प्लांट स्थापित किए जाएंगे, हालांकि अभी तक सटीक स्थान का खुलासा नहीं किया गया है। प्रत्येक संयंत्र हजारों टन कचरे को संसाधित कर पर्याप्त बायोमिथेन उत्पन्न करेगा, जो हजारों घरों या व्यावसायिक बेड़ों को चलाने के लिए पर्याप्त होगा। यह पहल भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों और कृषि में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की सरकारी नीति के अनुरूप है।
विश्लेषकों का मानना है कि ₹1,000 करोड़ का यह निवेश बायो‑सीएनजी बाजार को महत्वपूर्ण गति देगा, क्योंकि नीति समर्थन और कम‑कार्बन ईंधन की बढ़ती मांग इस क्षेत्र को आकर्षक बना रही है। इस सहयोग से डेयरी किसानों को अपने कचरे को आय के स्रोत में बदलने का नया अवसर भी मिलेगा।