📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / YagyaAshram
धर्म
टीकमगढ़ रथ यात्रा में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बेटियों को आईएएस‑आईपीएस बनने का आग्रह
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 15 अक्टू. 2026, 05:01 PM
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टीकमगढ़ में सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बेटियों को आईएएस‑आईपीएस बनने की अपील की और गरबा पंडालों में वराह प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा।
टीकमगढ़, मध्य प्रदेश – सनातन हिंदू एकता रथ यात्रा के अवसर पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने उपस्थित लोगों को संबोधित कर बेटियों को आईएएस‑आईपीएस जैसी शीर्ष सिविल सेवा पदों के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन सेवाओं में करियर बनाना परिवार की प्रतिष्ठा बढ़ाएगा और राष्ट्र निर्माण में योगदान देगा।
शास्त्री ने गरबा समारोहों के संदर्भ में भी टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने गरबा पंडालों में भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उनका मानना था कि ऐसा करने से पारंपरिक मूल्यों को सुदृढ़ता मिलेगी और उत्सव के दौरान आध्यात्मिक सुरक्षा भी होगी।
इन बयानों पर उपस्थित लोगों में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखी गईं; कुछ ने उच्च शिक्षा और सार्वजनिक सेवा के लिए प्रेरणा की सराहना की, जबकि अन्य ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में धार्मिक प्रतीकों की उपयुक्तता पर सवाल उठाए। अभी तक स्थानीय प्राधिकरणों की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
रथ यात्रा अपने सामान्य रथों की शोभा और भजन‑कीर्तन के साथ जारी रही, जिसमें जिले के विभिन्न हिस्सों से भाग लेने वाले लोग शामिल हुए। यह कार्यक्रम वार्षिक रूप से हिंदू एकता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जाता है।
शास्त्री ने गरबा समारोहों के संदर्भ में भी टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने गरबा पंडालों में भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उनका मानना था कि ऐसा करने से पारंपरिक मूल्यों को सुदृढ़ता मिलेगी और उत्सव के दौरान आध्यात्मिक सुरक्षा भी होगी।
इन बयानों पर उपस्थित लोगों में मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखी गईं; कुछ ने उच्च शिक्षा और सार्वजनिक सेवा के लिए प्रेरणा की सराहना की, जबकि अन्य ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में धार्मिक प्रतीकों की उपयुक्तता पर सवाल उठाए। अभी तक स्थानीय प्राधिकरणों की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
रथ यात्रा अपने सामान्य रथों की शोभा और भजन‑कीर्तन के साथ जारी रही, जिसमें जिले के विभिन्न हिस्सों से भाग लेने वाले लोग शामिल हुए। यह कार्यक्रम वार्षिक रूप से हिंदू एकता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जाता है।