📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ravi Dwivedi
मौसम
पाकिस्तान के उत्सर्जन से दिल्ली एनसीआर और पंजाब में वार्षिक पीएम2.5 बढ़ा, रिपोर्ट
✍️ The Economic Times
🗓 21 अग. 2026, 05:33 AM
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इकॉनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान से आने वाला प्रदूषण दिल्ली एनसीआर और पंजाब में वार्षिक औसत पीएम2.5 स्तर को बढ़ा रहा है।
इकॉनॉमिक टाइम्स ने एक अध्ययन प्रकाशित किया है जिसमें पाकिस्तान के औद्योगिक व वाहन उत्सर्जन को दिल्ली एनसीआर और पंजाब में पीएम2.5 के वार्षिक औसत स्तर में वृद्धि से जोड़ा गया है। उपग्रह डेटा और जमीनी मॉनिटरिंग स्टेशन के आधार पर यह पाया गया कि इन क्षेत्रों में वार्षिक पीएम2.5 का एक बड़ा हिस्सा सीमा‑पार प्रदूषण के कारण है।
शोधकर्ताओं ने 2018‑2023 के वर्ष‑भर के प्रदूषण प्रोफ़ाइल की तुलना की और उन समयावधियों की पहचान की जब हवा के प्रवाह से पाकिस्तान से धुआँ व धूल उत्तर भारत में पहुँचती थी। रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह सीमा‑पार योगदान न होता तो दिल्ली एनसीआर और पंजाब में वार्षिक पीएम2.5 स्तर काफी कम होते, जिससे वायु‑गुणवत्ता सूचकांक में सुधार होता।
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अधिकारियों को इस निष्कर्ष से अवगत कराया गया है और वे द्विपक्षीय एवं तकनीकी उपायों पर विचार कर रहे हैं ताकि साझा वायु‑गुणवत्ता समस्या का समाधान हो सके। अध्ययन ने क्षेत्रीय स्तर पर उत्सर्जन को कम करने के लिए समन्वित रणनीतियों की आवश्यकता पर बल दिया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि लगातार उच्च पीएम2.5 संपर्क से श्वसन व हृदय रोगों का जोखिम बढ़ता है। रिपोर्ट ने वास्तविक‑समय डेटा साझा करने, कड़ी निगरानी और दोनों देशों के बीच संयुक्त शमन प्रयासों की मांग की है।
हालाँकि पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया गया है, रिपोर्ट ने यह भी कहा है कि घरेलू स्रोत अभी भी महत्वपूर्ण हैं, इसलिए भारतीय राज्यों को स्थानीय उत्सर्जन नियंत्रण को सुदृढ़ करने के साथ‑साथ सीमा‑पार उपायों को भी आगे बढ़ाना चाहिए।
शोधकर्ताओं ने 2018‑2023 के वर्ष‑भर के प्रदूषण प्रोफ़ाइल की तुलना की और उन समयावधियों की पहचान की जब हवा के प्रवाह से पाकिस्तान से धुआँ व धूल उत्तर भारत में पहुँचती थी। रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह सीमा‑पार योगदान न होता तो दिल्ली एनसीआर और पंजाब में वार्षिक पीएम2.5 स्तर काफी कम होते, जिससे वायु‑गुणवत्ता सूचकांक में सुधार होता।
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अधिकारियों को इस निष्कर्ष से अवगत कराया गया है और वे द्विपक्षीय एवं तकनीकी उपायों पर विचार कर रहे हैं ताकि साझा वायु‑गुणवत्ता समस्या का समाधान हो सके। अध्ययन ने क्षेत्रीय स्तर पर उत्सर्जन को कम करने के लिए समन्वित रणनीतियों की आवश्यकता पर बल दिया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि लगातार उच्च पीएम2.5 संपर्क से श्वसन व हृदय रोगों का जोखिम बढ़ता है। रिपोर्ट ने वास्तविक‑समय डेटा साझा करने, कड़ी निगरानी और दोनों देशों के बीच संयुक्त शमन प्रयासों की मांग की है।
हालाँकि पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया गया है, रिपोर्ट ने यह भी कहा है कि घरेलू स्रोत अभी भी महत्वपूर्ण हैं, इसलिए भारतीय राज्यों को स्थानीय उत्सर्जन नियंत्रण को सुदृढ़ करने के साथ‑साथ सीमा‑पार उपायों को भी आगे बढ़ाना चाहिए।