📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / William Francis Lynch
धर्म
पितृ मोक्ष अमावस्या पर ओंकारेश्वर में 50,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में स्नान किया
✍️ Amar Ujala · Madhya Pradesh
🗓 10 अक्टू. 2026, 12:36 PM
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पितृ मोक्ष अमावस्या पर ओंकारेश्वर में 50,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने नर्मदा में स्नान कर पूर्वजों के लिए तर्पण एवं पूजन किया।
पितृ मोक्ष अमावस्या के अवसर पर ओंकारेश्वर के नर्मदा घाट पर 50,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया। भक्तों ने प्रातःकाल ही पवित्र नर्मदा में प्रवेश कर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण एवं पूजन किया, जिससे उन्हें मोक्ष की आशा है।
रात भर घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान जारी रहे। पुजारी ने मंत्रोच्चारण और पूजा-अर्चना की, जबकि भजन‑कीर्तन और गीता पाठ से माहौल पवित्र बना रहा।
स्थानीय प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए पुलिस, चिकित्सा दल और जल सुरक्षा टीमों को तैनात किया। बड़ी भीड़ के बावजूद कोई बड़ी समस्या नहीं हुई, जिससे पितृ मोक्ष के महत्व को दर्शाते हुए शांति बनी रही।
समारोह में स्थानीय लोक परम्परा के अनुसार निमाड़ी गम्मत का भी आयोजन किया गया, जिससे धार्मिक अनुष्ठान में सांस्कृतिक रंग जुड़ गया।
ओंकारेश्वर इस प्रकार एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत करता है, विशेषकर उन त्यौहारों में जहाँ पूर्वजों को सम्मानित किया जाता है, और यह दर्शाता है कि नदियों में स्नान की परम्परा आज भी भारतीय आध्यात्मिकता में जीवित है।
रात भर घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान जारी रहे। पुजारी ने मंत्रोच्चारण और पूजा-अर्चना की, जबकि भजन‑कीर्तन और गीता पाठ से माहौल पवित्र बना रहा।
स्थानीय प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के लिए पुलिस, चिकित्सा दल और जल सुरक्षा टीमों को तैनात किया। बड़ी भीड़ के बावजूद कोई बड़ी समस्या नहीं हुई, जिससे पितृ मोक्ष के महत्व को दर्शाते हुए शांति बनी रही।
समारोह में स्थानीय लोक परम्परा के अनुसार निमाड़ी गम्मत का भी आयोजन किया गया, जिससे धार्मिक अनुष्ठान में सांस्कृतिक रंग जुड़ गया।
ओंकारेश्वर इस प्रकार एक प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत करता है, विशेषकर उन त्यौहारों में जहाँ पूर्वजों को सम्मानित किया जाता है, और यह दर्शाता है कि नदियों में स्नान की परम्परा आज भी भारतीय आध्यात्मिकता में जीवित है।