📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ujjain Chronicles
धर्म
गया में पितृपक्ष मेले में पितृ वाटिका में 500 से अधिक पेड़ लगाए
✍️ Amar Ujala · Gaya
🗓 04 अक्टू. 2026, 07:02 PM
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पितृपक्ष मेले के दौरान गया में पितृ वाटिका में ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ अभियान के तहत 500 से अधिक पौधे लगाए गए हैं।
गया में आयोजित पितृपक्ष मेले के दौरान स्थानीय स्वयंसेवकों ने ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ अभियान के तहत पितृ वाटिका में पेड़ लगाने की पहल शुरू की। इस पहल में श्रद्धालु अपने पूर्वजों की स्मृति में मुफ्त पौधे लगाते हैं और प्रत्येक पौधे पर पूर्वज का नाम अंकित किया जाता है।
आयोजकों के अनुसार अब तक पितृ वाटिका में 500 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। प्रत्येक पौधे के साथ एक छोटा पट्टा दिया जाता है जिसमें लगाई गई पीढ़ी का विवरण लिखा जाता है।
मेले में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं ने इस पहल को आध्यात्मिक श्रद्धा और पर्यावरणीय योगदान दोनों के रूप में सराहा। आयोजक भविष्य के मेले में इस कार्यक्रम को और विस्तारित करने की योजना बना रहे हैं, जिससे गया के आसपास हरियाली बढ़ेगी।
स्थानीय प्राधिकरणों ने इस पहल का समर्थन किया है, यह कहते हुए कि जब ये पौधे बड़े होंगे तो वे शहर के दृश्य को सुशोभित करेंगे और पूर्वजों की याद को जीवित रखेंगे।
पितृ वाटिका अब एक ऐसा प्रतीकात्मक बाग बन चुका है जहाँ धार्मिक भावना और पर्यावरणीय जागरूकता का संगम दिखता है, जो भारत में बढ़ते इको‑स्पिरिचुअल प्रवृत्ति को दर्शाता है।
आयोजकों के अनुसार अब तक पितृ वाटिका में 500 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। प्रत्येक पौधे के साथ एक छोटा पट्टा दिया जाता है जिसमें लगाई गई पीढ़ी का विवरण लिखा जाता है।
मेले में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं ने इस पहल को आध्यात्मिक श्रद्धा और पर्यावरणीय योगदान दोनों के रूप में सराहा। आयोजक भविष्य के मेले में इस कार्यक्रम को और विस्तारित करने की योजना बना रहे हैं, जिससे गया के आसपास हरियाली बढ़ेगी।
स्थानीय प्राधिकरणों ने इस पहल का समर्थन किया है, यह कहते हुए कि जब ये पौधे बड़े होंगे तो वे शहर के दृश्य को सुशोभित करेंगे और पूर्वजों की याद को जीवित रखेंगे।
पितृ वाटिका अब एक ऐसा प्रतीकात्मक बाग बन चुका है जहाँ धार्मिक भावना और पर्यावरणीय जागरूकता का संगम दिखता है, जो भारत में बढ़ते इको‑स्पिरिचुअल प्रवृत्ति को दर्शाता है।