📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Ministry of Power
बिज़नेस
ओडिशा को नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण और ग्रिड अवसंरचना बढ़ाने के लिए 1.1 ट्रिलियन रुपये की आवश्यकता
✍️ Business Standard
🗓 16 अक्टू. 2026, 07:17 AM
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ओडिशा राज्य सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने, भंडारण सुविधाएँ सुधारने और पावर ग्रिड को उन्नत करने के लिए 1.1 ट्रिलियन रुपये के निवेश योजना का विवरण दिया है।
ओडिशा की राज्य सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने, भंडारण समाधान सुधारने और पावर ग्रिड को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से 1.1 ट्रिलियन रुपये का निवेश योजना घोषित की है। यह प्रस्ताव, पावर मंत्रालय द्वारा जारी किया गया, बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप है।
इस योजना का लक्ष्य अगले दशक में 4,000 मेगावाट नवीकरणीय उत्पादन बढ़ाना है, जिसमें सौर, पवन और जल परियोजनाओं का मिश्रण शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि नई क्षमता राज्य की कोयले पर निर्भरता को कम करेगी और 2025 के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य 30% को प्राप्त करने में मदद करेगी।
सौर और पवन ऊर्जा की अनियमित प्रकृति का समर्थन करने के लिए, प्रस्ताव में 250 बिलियन रुपये बड़े पैमाने पर बैटरी भंडारण और पम्प्ड-स्टोरेज सुविधाओं के लिए आवंटित किए गए हैं। ट्रांसमिशन लाइनों और सबस्टेशनों को उन्नत करना भी प्राथमिकता होगी, जिससे दूरस्थ उत्पादन स्थलों से शहरी केंद्रों तक बिजली का कुशल वितरण सुनिश्चित हो सके।
सरकार आने वाले महीनों में टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का इरादा रखती है, और पहली परियोजनाएँ 2025 तक निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। यह निवेश राज्य फंड, केंद्रीय अनुदान और निजी क्षेत्र की भागीदारी के संयोजन से वित्तपोषित होगा।
इस योजना का लक्ष्य अगले दशक में 4,000 मेगावाट नवीकरणीय उत्पादन बढ़ाना है, जिसमें सौर, पवन और जल परियोजनाओं का मिश्रण शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि नई क्षमता राज्य की कोयले पर निर्भरता को कम करेगी और 2025 के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य 30% को प्राप्त करने में मदद करेगी।
सौर और पवन ऊर्जा की अनियमित प्रकृति का समर्थन करने के लिए, प्रस्ताव में 250 बिलियन रुपये बड़े पैमाने पर बैटरी भंडारण और पम्प्ड-स्टोरेज सुविधाओं के लिए आवंटित किए गए हैं। ट्रांसमिशन लाइनों और सबस्टेशनों को उन्नत करना भी प्राथमिकता होगी, जिससे दूरस्थ उत्पादन स्थलों से शहरी केंद्रों तक बिजली का कुशल वितरण सुनिश्चित हो सके।
सरकार आने वाले महीनों में टेंडर प्रक्रिया शुरू करने का इरादा रखती है, और पहली परियोजनाएँ 2025 तक निर्माण शुरू होने की उम्मीद है। यह निवेश राज्य फंड, केंद्रीय अनुदान और निजी क्षेत्र की भागीदारी के संयोजन से वित्तपोषित होगा।