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28 सित. 2026•
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अवैध हिरासत और हमले के लिए पुलिस पर मुकदमा चलाने को सरकारी मंजूरी जरूरी नहीं: न्यायालय
📷 चित्र स्रोत: Wikimedia Commons / Pokemonprime
देश

अवैध हिरासत और हमले के लिए पुलिस पर मुकदमा चलाने को सरकारी मंजूरी जरूरी नहीं: न्यायालय

✍️ Live Law 🗓 03 सित. 2026, 05:40 AM 👁 32
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न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि आधिकारिक कर्तव्य से परे की गई अवैध हिरासत और हमले के लिए पुलिस अधिकारियों पर बिना पूर्व सरकारी मंजूरी के मुकदमा चलाया जा सकता है।

एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसले में, न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आधिकारिक कर्तव्य के दायरे से बाहर की गई अवैध हिरासत और हमले के आरोप में पुलिस अधिकारियों पर बिना पूर्व सरकारी मंजूरी के मुकदमा चलाया जा सकता है। यह फैसला कानून प्रवर्तन कर्मियों को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस पर एक स्पष्ट रुख अपनाता है।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब पुलिस कर्मी अपने आधिकारिक कर्तव्य से बाहर कार्य करते हैं — जैसे किसी को अवैध रूप से हिरासत में लेना या बिना कानूनी आधार के शारीरिक हमला करना — तो ऐसे कार्यों को आधिकारिक कार्यों के निर्वहन के रूप में नहीं माना जा सकता। इसलिए, मुकदमे के लिए पूर्व मंजूरी की आवश्यकता वाली सुरक्षात्मक ढाल ऐसी परिस्थितियों में लागू नहीं होती।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय पुलिस विभाग के भीतर जवाबदेही सुनिश्चित करने के संदर्भ में दूरगामी प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि यह एक प्रक्रियात्मक बाधा को हटाता है जो अक्सर अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को रोकती या देरी करती थी। यह फैसला इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि जब किसी का आचरण ईमानदारी से कर्तव्य निर्वहन के बजाय एक आपराधिक अपराध के रूप में होता है, तो वर्दी धारण करने वालों सहित कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
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